क्या जांच को हाईजैक करने की हो रही है साजिश? दावतों और आवभगत के बीच मामला रफा-दफा होने की जनचर्चाओं का बाजार गर्म
(उड़ती खबरें विशेष: संपादक गजेंद्र परिहार की कलम से )
बाघों की मौत पर एसआईटी जांच और खातिरदारी की जनचर्चा
शहडोल/उमरिया :बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में गठित एसआईटी के अधिकारी तीन दिन पहले यहां पहुंच चुके हैं और बताया जा रहा है कि वे घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। लेकिन, जनचर्चाओं की मानें तो जांच से ज्यादा यहां खातिरदारी का खेल चलने की सुगबुगाहट है। ऐसा बताया जाता है कि कुछ स्थानीय अधिकारियों के चहेते और लगुए -भगुए लोग एसआईटी की टीम को अपनी आवभगत से कथित तौर पर मनमोहित करने और पूरी जांच को टेकओवर व हाईजैक करने का प्रयास कर रहे हैं। चर्चा यह भी है कि तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर के दो खास नुमाइंदे, भले ही प्रत्यक्ष रूप से सामने न आ रहे हों, लेकिन चर्चाओं के अनुसार टीम के खाने-पीने से लेकर ठहरने तक की पूरी व्यवस्थाओं में उनका ही इंटरफेयर बताया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब व्यवस्थाएं ही ऐसे लोगों के हाथों में होने की चर्चा हो, तो जांच कितनी स्वतंत्र और निष्पक्ष हो पाएगी।
साहब के कारिंदे की सक्रियता,विश्वसनीयता पर उठते सवाल
इस पूरे मामले में एक और बड़ी जनचर्चा जोरों पर है कि एक 'बड़े साहब' का खास कारिंदा भी इस पूरे मामले को कथित रूप से रफा-दफा करवाने के लिए जांच समिति के इर्द-गिर्द लगातार चक्कर लगा रहा है। बताया जा रहा है कि पर्दे के पीछे से पूरी कोशिश की जा रही है कि किसी भी तरह से एसआईटी की जांच को प्रभावित कर लिया जाए। यह एक बेहद गंभीर विषय है कि आखिर इन चर्चाओं और दावों के पीछे की सच्चाई क्या है। आम जनमानस में यह सुगबुगाहट तेज है कि अगर एसआईटी के अधिकारी इस तरह की कथित शाही दावतों और बाहरी दखलअंदाजी के बीच घिरे रहने की चर्चाओं का हिस्सा बनेंगे, तो इस विशेष जांच का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। इन हालातों और उड़ती हुई खबरों के बीच जांच दल की विश्वसनीयता पर बहुत बड़े और गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।


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