प्रशासन को घेरने की साजिश: सरेआम पटक कर फोड़ी मां दुर्गा की प्रतिमा, हिंदू आस्था पर प्रहार
प्रोपेगेंडा: धर्म की आड़ में पनप रहा था अधर्म और अवैध कारोबार, कार्रवाई होने पर देवी का अपमान
प्रशासन पर दबाव बनाने जुटा रहे भीड़, अपनी करतूत छिपाने के लिए गढ़ा जा रहा भ्रामक नैरेटिव
देवी प्रतिमा का अपमान करने वाले अराजक तत्वों पर क्या दर्ज होगा मुकदमा? पुलिस के एक्शन का इंतजार।
बुढ़ार : बुढ़ार में शासकीय भूमि पर विगत 20 वर्षों से स्थापित दुर्गा पंडाल को लेकर शासन या प्रशासन को कभी कोई आपत्ति नहीं रही है। प्रशासन ने सदैव जन आस्था का सम्मान किया है। लेकिन, जनचर्चा है कि इस पवित्र पंडाल की आड़ में कथित तौर पर अवैध कारोबार और गैर-कानूनी पक्का निर्माण किया जा रहा था, जो विवाद की असली जड़ है। स्थानीय लोगों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए जब अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) के निर्देश पर नगर पालिका की टीम ने इस अवैध निर्माण पर रोक लगाई, तो अतिक्रमण में लिप्त तत्वों के मंसूबों पर पानी फिर गया।
आप आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति ने किया देवी का अपमान
अपनी कथित काली करतूतों पर प्रशासन की वैधानिक कार्रवाई होती देख, प्रशासन को घेरने और दबाव बनाने के लिए आस्था को ढाल बनाया गया। जनचर्चा और वायरल वीडियो के अनुसार, एक स्थानीय आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति ने उग्रता में मंच पर चढ़कर सरेआम मां दुर्गा की प्रतिमा/तस्वीर को पटक कर फेंक दिया। अधिकारियों के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए इन तत्वों ने अपनी अवैध गतिविधियों को बचाने के लिए स्वयं हिंदू आस्था पर सीधा प्रहार किया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे प्रशासनिक कार्रवाई को निष्प्रभावी करने के लिए यह घिनौना कृत्य किया गया।
भीड़ जुटाकर भ्रामक प्रोपेगेंडा
अब अपनी इस शर्मनाक और उग्र करतूत को छिपाने के लिए स्थानीय स्तर पर एक भ्रामक प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है। कथित अवैध कारोबार और अतिक्रमण रोकने की वैधानिक कार्रवाई को 'धार्मिक भावनाएं आहत होने' का मनगढ़ंत रंग देकर लोगों को इकट्ठा किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि धर्म की आड़ में नियम विरुद्ध काम करने वाले यह तत्व प्रशासन को ब्लैकमेल करने के लिए भीड़ तंत्र का सहारा ले रहे हैं, ताकि अवैध निर्माण के मूल मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
वीडियो साक्ष्य के आधार पर बन सकती हैं गंभीर धाराएं
इस पूरे घटनाक्रम और देवी प्रतिमा को फेंकने का वीडियो साक्ष्य अब प्रशासन के पास मौजूद है। कानूनी जानकारों के अनुसार, वीडियो साक्ष्यों के आधार पर इस कृत्य में लिप्त आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति और उसके सहयोगियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कई गंभीर मामले दर्ज हो सकते हैं। देवी की तस्वीर या प्रतिमा को जानबूझकर फेंकने के कृत्य पर धारा 298 (पवित्र वस्तु का अपमान) और सुनियोजित तरीके से आस्था को ठेस पहुंचाने पर धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) के तहत प्रकरण बन सकता है। इसके साथ ही, धार्मिक स्थल पर उग्रता व अशांति फैलाने पर धारा 300 (धार्मिक सभा में विघ्न डालना) और प्रशासन के खिलाफ भ्रामक नारे लगाकर भीड़ को भड़काने के आरोप में धारा 353 (लोक शांति भंग करने के इरादे से उकसाना) भी लगाई जा सकती है। आरोपी की कथित आपराधिक पृष्ठभूमि और त्योहार के समय माहौल बिगाड़ने के कुत्सित प्रयास को देखते हुए प्रशासन राज्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिला बदर या रासुका (NSA) जैसी सख्त निरोधात्मक कार्रवाई करने के लिए भी पूर्ण रूप से स्वतंत्र है। अब जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस प्रशासन धर्म की आड़ में यह कृत्य करने वालों पर कब और क्या कानूनी कार्रवाई करता है।





0 Comments