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कैमरे में करतूत कैद!! आबकारी कायदों का मखौल: बुढ़ार रोड पर सरेआम उतर रही दो नंबर की शराब



वायरल वीडियो ने खोली आबकारी तंत्र की पोल.. मिलीभगत उजागर दिन दहाड़े जारी खेल


गुड्डू खरे के हांथ मैनेजमेंट.... साले को बनाया PRO, समाचारों को गलत ठहराने की दी जिम्मेदारी 


ठेकेदार लक्ष्मी जायसवाल के हौसले बुलंद, बिना नंबर की बुलेरो से दिनदहाड़े चल रहा अवैध कारोबार


आबकारी के मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, माफियाओं के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम


शहडोल जिले में शराब माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है। शहर के बुढ़ार रोड स्थित शराब दुकान पर सरेआम अवैध शराब की खेप उतारी जा रही है, जो पूरे सिस्टम के लिए एक खुली चुनौती है। मीडिया द्वारा इससे पूर्व भी 'लक्ष्मी-सावित्री' की कथित पार्टनरशिप और 37 अवैध उप-दुकानों का भंडाफोड़ किया गया था, लेकिन इसके बावजूद माफियाओं की मनमानी बदस्तूर जारी है। बिना नंबर की गाड़ियों का इस्तेमाल कर टैक्स चोरी और दो नंबर की शराब को खपाने का यह गोरखधंदा दिन के उजाले में बेखौफ जारी है। ठेकेदार लक्ष्मी जायसवाल के गुर्गों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस काले कारोबार ने आबकारी विभाग के मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि निचले स्तर पर निगरानी तंत्र पूरी तरह से विफल हो चुका है।


शहडोल: विशेष संवाददाता गजेंद्र सिंह परिहार की रिपोर्ट। जिले में आबकारी नियम महज कागजों तक सिमट कर रह गए हैं और धरातल पर शराब ठेकेदार अपनी मनमर्जी से कारोबार चला रहे हैं। बुढ़ार रोड स्थित कम्पोजिट शराब दुकान के सामने का यह लाइव वीडियो इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि अवैध शराब का कारोबार किस बेखौफी से चल रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सफेद रंग की बिना नंबर वाली बुलेरो से दिनदहाड़े शराब की पेटियां उतारी जा रही हैं। यह दुस्साहस दर्शाता है कि निचले स्तर के कर्मचारियों की कथित लापरवाही या अनदेखी के कारण ठेकेदारों को अभयदान मिला हुआ है, जिससे सरकारी राजस्व को हर दिन भारी नुकसान हो रहा है।


बिना नंबर की गाड़ी से अवैध परिवहन


शराब के परिवहन के लिए आबकारी नियमों के तहत ऑनलाइन ट्रांजिट पास और पंजीकृत वाहन का होना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा कि ठेकेदार लक्ष्मी जायसवाल के लोग बिना नंबर की सफेद बुलेरो में धड़ल्ले से शराब की पेटियां ढो रहे हैं। बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ी का परमिट ऑनलाइन सिस्टम में जनरेट होना तकनीकी रूप से असंभव है, जिसका सीधा अर्थ है कि यह खेप पूरी तरह से अवैध है। मोटर व्हीकल एक्ट और आबकारी नियमों की इस तरह सरेआम धज्जियां उड़ना यह साबित करता है कि माफियाओं को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई का कोई डर नहीं है।


मैदानी अमले की कार्यप्रणाली कटघरे में


इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग के मैदानी अमले यानी उड़नदस्ते और निरीक्षकों की भूमिका पर उठता है। शहर के इतने व्यस्त और मुख्य मार्ग पर बिना नंबर की गाड़ी से शराब की लोडिंग-अनलोडिंग हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है। यह लापरवाही दर्शाती है कि मैदानी अमला अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी मुस्तैदी से नहीं कर रहा है। निचले स्तर पर हो रही इसी अनदेखी का फायदा उठाकर ठेकेदार बेखौफ होकर अपने अवैध साम्राज्य को बढ़ा रहे हैं और विभागीय साख को बट्टा लगा रहे हैं।


पूर्व के खुलासों से भी नहीं लिया सबक


गौरतलब है कि हाल ही में मीडिया ने एक प्रमुख खबर प्रकाशित कर जिले में चल रहे अवैध शराब के इस बड़े सिंडिकेट का विस्तार से पर्दाफाश किया था। उस खबर में 'लक्ष्मी-सावित्री' की कथित पार्टनरशिप की चर्चा और 7 लाइसेंस की आड़ में 37 से ज्यादा अवैध उप-दुकानों के संचालन की पोल खोली गई थी। खबर में स्पष्ट रूप से 'वीरेंद्र टोपी' द्वारा पैकार मैनेजमेंट संभालने और बिना नंबर की गाड़ियों से सप्लाई की बात प्रमुखता से उठाई गई थी। इतने बड़े खुलासे के बावजूद आबकारी विभाग के मैदानी अमले ने कोई सबक नहीं लिया और न ही कोई ठोस कदम उठाया, जिसका ही नतीजा है कि अब माफियाओं के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि वे बीच सड़क पर सरेआम दो नंबर की शराब उतारने लगे हैं।


राजस्व का नुकसान और माफियाओं का वर्चस्व


बिना नंबर की गाड़ी से शराब का यह अवैध परिवहन केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर शासन को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाना है। ठेकेदार द्वारा दो नंबर की शराब को एक नंबर की दुकान से खपाकर भारी मुनाफा कमाया जा रहा है। इस तरह के कृत्य माफियाओं के बढ़ते वर्चस्व और प्रशासनिक नियंत्रण की कमी को उजागर करते हैं। जब तक जमीनी स्तर पर सख्त चेकिंग और लगातार निगरानी नहीं होगी, तब तक शराब तस्कर इसी तरह शासन की आंखों में धूल झोंककर अपना काला कारोबार चलाते रहेंगे।बहरहाल हम वायरल वीडियो की पुष्टि हम नहीं करते। 


विभाग के लिए कड़ी कार्रवाई की चुनौती


अब यह पूरा मामला आबकारी विभाग के उच्चाधिकारियों और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद यह आवश्यक है कि इस बिना नंबर की बुलेरो को आबकारी अधिनियम की धारा 34 के तहत तत्काल राजसात किया जाए और दोषियों पर गैर-जमानती अपराध दर्ज हो। विभागीय अधिकारियों को चाहिए कि वे अपने मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर सख्ती बरतें। कड़ी कार्रवाई ही वह एकमात्र विकल्प है जिससे शराब ठेकेदारों में कानून का खौफ पैदा किया जा सकता है और इस बेलगाम हो चुके अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।


इनका कहना है


जानकारी आपके माध्यम से संज्ञान में आई है हम दिखवाते है कार्यवाही की जाएगी।

सुश्री सावित्री भगत

जिला आबकारी अधिकारी शहडोल


देखें वायरल वीडियो...



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