Ticker

6/recent/ticker-posts

पढ़ें कौन है जैतपुर का कृष्णा.. जिसकी अवैध रेत की लीला पूरे संभाग में है चर्चे में


कृष्णा बना माफिया... साथी से खुलवाई चार अवैध खदाने सब मैनेज मजाल कोई बंद करा ले खेल


शहडोल। जैतपुर में कुनुक नदी के सीने को चीरकर निकलने वाली सुनहरी रेत ने अब एक नए धनकुबेर और बेखौफ माफिया को जन्म दे दिया है, जिसका नाम है कृष्णा। यह वही कृष्णा है जिसकी अवैध रेत की 'लीला' इन दिनों पूरे शहडोल संभाग के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी जनचर्चा का विषय बनी हुई है। सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर या यूं कहें कि पूरे तंत्र को अपनी मुट्ठी में कैद कर कृष्णा ने रेत वसूली का ऐसा अजेय साम्राज्य खड़ा कर लिया है, जहां हर दिन लाखों की खुलेआम उगाही हो रही है। बिना किसी डर या खौफ के हर रोज दर्जनों हाईवा, ट्रैक्टर और डग्गी धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं और इस सारे काले खेल का इकलौता रिंगमास्टर कृष्णा बन बैठा है। 'मैनेजमेंट' के नाम पर कृष्णा की पकड़ इतनी अचूक है कि वह हर लोडिंग, हर ट्रिप का एंट्री टैक्स वसूल रहा है और उसकी अवैध कमाई का मासिक टर्नओवर लाखों की सीमा लांघ चुका है। मजाल है कि प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार नुमाइंदा इस खुले खेल पर रोक लगा सके, क्योंकि कृष्णा ने ऊपर से नीचे तक सबको अपने 'अंकगणित' से पूरी तरह सेट कर रखा है। 


इस समूचे काले कारोबार में कृष्णा का दुस्साहस तब और बढ़ गया जब उसने पर्दे के पीछे से अपने एक खास साथी के जरिए जैतपुर क्षेत्र में एक साथ चार बड़ी अवैध खदानें खुलवा दीं। इन चारों घाटों पर चलने वाले अवैध उत्खनन में पूरी तरह कृष्णा का ही सिक्का चलता है, लेकिन इस सिंडिकेट के भीतर भी वर्चस्व और मुनाफे की एक अलग ही जंग अंदर ही अंदर सुलग रही है। तल्ख सच तो यह है कि कृष्णा का वह साथी, जिसने इस पूरे नेटवर्क की नींव रखने और खदानें चालू करवाने में अहम भूमिका निभाई थी, अब समय-समय पर उस पर अपना भारी दबाव बनाता रहता है। काली कमाई के बड़े हिस्से और घाटों के नियंत्रण को लेकर इस साथी का कृष्णा पर पड़ने वाला यह दबाव अक्सर उनके सिंडिकेट में हलचल मचा देता है। बावजूद इसके, कृष्णा अपनी शातिराना चालों और अचूक मैनेजमेंट से हर बार तंत्र को अपने पाले में कर लेता है। रेत के इस काले समंदर में साथी की लगातार दखलंदाजी और कृष्णा के बेखौफ माफिया राज ने जैतपुर को लूट का सबसे बड़ा अड्डा बना दिया है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर सरकार के राजस्व को भुगतना पड़ रहा है।

Post a Comment

0 Comments