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गणेश विसर्जन संपन्न: क्या आज शाम से फिर गुलजार होंगी कमांडो और मोनू की अवैध खदानें?



ढोल के अंदर पोल या सख्ती की आड़ में मलाई? आज खुलेगा कप्तान के खौफ का राज!

लेदरा से नवाटोला तक हर खदान के माफिया तैयार, बस खाकी के इशारे का है इंतजार!

करोड़ों की अकूत संपत्ति का मालिक बना वसूलीबाज 'कमांडो', क्या कप्तान कराएंगे निष्पक्ष जांच?

फेरबदल की गाज से कैसे बचे डायरी के धुरंधर, इन बेलगाम वसूलीबाजों पर कब होगा एक्शन!


शहडोल जिले में पुलिसिया सख्ती महज एक दिखावा है या सच में माफियाओं पर लगाम कसी गई है, इसका असली इम्तिहान आज होना है। बीते दो दिनों से गणेश विसर्जन और नदियों में उफान के चलते कथित वसूलीबाजों ने अवैध रेत खदानों पर अस्थाई ब्रेक लगा रखा था। जनचर्चा है कि आज शाम से यह ब्रेक हटने वाला है। यदि आज सोहागपुर में कमांडो के नेतृत्व में लेदरा से मुख्यालय तक रेत सप्लाई शुरू होती है और गोहपारू में मोनू के संरक्षण में नवाटोला, चुहरी, खानौदी और भूरसी की खदानें फिर से गुलजार होती हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कप्तान की सख्ती के दावों के पीछे असल में मलाई काटने का खेल चल रहा है।





शहडोल : बताया जाता है की जिला मुख्यालय के समीप हर प्रमुख अवैध खदान पर रेत माफिया अपने मिनी ट्रकों और मशीनों के साथ पूरी तरह से तैयार बैठे हैं। विसर्जन का शोर थमते ही अब बस खाकी वर्दी वाले आकाओं के एक इशारे का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। माफियाओं ने पहले ही अपनी गोटियां सेट कर ली हैं यदि आज से नदियों का सीना चीरकर फिर से रेत की निकासी और परिवहन शुरू होता है, तो यह साबित हो जाएगा कि पूरा सिस्टम इन माफियाओं की मुट्ठी में कैद है और खदानों पर लगा अस्थाई ताला सिर्फ मौसम की मजबूरी था, खाकी का खौफ नहीं।

कमांडो की संपत्ति की हो जांच

जनचर्चाओं का बाजार गर्म है कि वर्दी की आड़ में अवैध वसूली का सिंडिकेट चलाने वाले कथित 'कमांडो' ने रातों-रात करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया है। चंद रुपयों की पगार पाने वाले इस मुलाजिम के पास जमीन के बड़े कारोबार और अकूत बेनामी संपत्ति आखिर कहां से आई? यदि पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी ईमानदारी से इस वसूलीबाज की संपत्तियों और इसके आर्थिक लेन-देन की निष्पक्ष जांच करा लें, तो भ्रष्टाचार का एक बड़ा ज्वालामुखी फटेगा। बिना राजनीतिक और विभागीय संरक्षण के एक मामूली नुमाइंदे का इतना बड़ा भू-माफिया बन जाना सीधे तौर पर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मोनू के सिस्टम में कौन कौन बेबस

गोहपारू क्षेत्र में 'मोनू' का सिस्टम इतना तगड़ा बताया जा रहा है कि इसके आगे पूरा महकमा बेबस नजर आता है। चुहरी नवाटोला से लेकर खानौदी और भूरसी तक की अवैध खदानों का संचालन इसी कथित वसूलीबाज के इशारों पर होने की खबरें आम हैं। आखिर मोनू की डायरी में ऐसे कौन से सफेदपोश और खाकीधारी रसूखदार दर्ज हैं, जिनके दबाव में स्थानीय पुलिस से लेकर खनिज विभाग तक ने अपनी आंखें मूंद रखी हैं? सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि इस सिस्टम में ऊपर से लेकर नीचे तक का हिस्सा तय है, जिसके चलते कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस इलाके में झांकने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाता।

इन वसूली बाजों पर कार्यवाही कब

जिले में हाल ही में हुए पुलिसिया फेरबदल में इधर-उधर कई लोगों पर गाज जरूर गिरी, लेकिन कुछ चुनिंदा वसूलीबाज बड़ी आसानी से बचा लिए गए। इन बहुचर्चित चेहरों पर न तो वरिष्ठ अधिकारियों का खौफ काम कर रहा है और न ही खाकी का इकबाल। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कप्तान की सख्ती इन गिने-चुने डायरी विशेषज्ञों पर कब चलेगी?

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