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खाकी की सरपरस्ती, माफियाओं की मस्ती: शहडोल में बेलगाम हुआ अवैध खनन

 


एसपी की खामोशी पर उठे गंभीर सवाल, नवाटोला से लेदरा तक बेखौफ दौड़ रहे मिनी ट्रक!!


मनोज विवेक जैसे नए माफियाओं के उदय का जिम्मेदार कौन ??


बाडी खा रही खेत कब बढ़े अधिकारी लेंगे संज्ञान..!!


सख्ती के बाद फिर पुराने ढर्रे में जिले जी गाड़ी,बंद कामों को भी हरी झंडी



शहडोल : नवागत पुलिस कप्तान द्वारा प्रशासनिक दृष्टिकोण से किए गए फेरबदल अब सवालों की जड़ में हैं। कारण बिल्कुल सामान्य है कि क्या पुराने स्थापित वसूलीबाजों को हटाकर नए भरोसेमंदों को बैठाने के लिए यह पटकथा लिखी गई? गोहपारू और सोहागपुर थाना प्रभारी को फोन लगाकर सूचना दी जाती है कि फलां-फलां स्थान पर फलां-फलां व्यक्तियों द्वारा अवैध खदान का संचालन कराया जा रहा है, रेत की चोरी हो रही है। चलो मान लिया अवैध उत्खनन खनिज विभाग का जिम्मा है, लेकिन रेत चोरी, अवैध परिवहन, माफियाओं के बुलंद हौसले और सड़क की जिम्मेदारी तो खाकी की है ना...!! लेकिन इन जिम्मेदारों से परे कमांडो और मोनू जैसे नाम अब कप्तान की साख पर बट्टा लगाते सीधे तौर पर प्रतीत हो रहे हैं। इनके अलावा बड़े पैमाने पर बंद पड़ी अवैध गतिविधियों का संचालन पुनः शहडोल जिला मुख्यालय में होना भी साहबान की कार्यशैली पर प्रश्नवाचक चिन्ह का काम कर रहा है।





अवैध धंधों पर बेखौफ माफिया


साहब के नाक के नीचे, भय तो दूर सीधे चुनौती देते हुए शासकीय कार्यालय में सेंध लगाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है और अवैध रेत खदान, खाकी के संरक्षण, कमांडो जैसे दर्जनों अखबार की कटिंग और सोशल मीडिया पोस्टर वायरल हैं। मुखबिर तंत्र शून्य है। अब अगर कोई प्रदेश पुलिस विभाग के मुखिया से व्हाट्सएप पर पूछ लेगा, तो चुनौती भरी चोरी अथवा फिर प्रारंभ हुए अवैध धंधों पर अधिकारी क्या जवाब देंगे? बहरहाल इस चोरी, अवैध बड़े कारोबार और फिर गुलजार होने की चर्चा को अगले अंक के लिए छोड़ते हैं और अभी बात करते हैं महज गणेश विसर्जन के दौरान अल्फा के घाट निरीक्षण की वजह से जो अवैध उत्खनन 2 दिन के लिए बंद हुआ था, उसे रविवार की देर रात 8 बजे से फिर कथित कमांडो और मोनू ने हरी झंडी दिखा दी। जिसकी सूचना विधिवत वर्जन के लिए दोनों थाना प्रभारियों को दी गई, पर सन्नाटा छाया रहा। समाचार हमारे पास ही नहीं, दर्जनों वायरल हैं। साहबान की सस्ती लोकप्रियता बटोरने के समाचार पोस्ट के नीचे के कमेंट ही किसी जिम्मेदार को चुल्लू भर पानी वाली कहावत चरितार्थ करने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन इसके विपरीत दिखावे की सख्ती, निष्क्रिय थाना प्रभारी के कंधे पर बंदूक रखकर मातहतों के माध्यम से खेल जैसा यह पूरा घटनाक्रम प्रतीत हो रहा है।





रात भर दौड़े मिनी ट्रक, भूसा तिराहे पर पुलिस तैनात


रविवार की देर शाम 8:00 बजे से फर्राटे भरते हुए मिनी ट्रक शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बाणगंगा से लेकर, या यूं कहें कि बस स्टैंड बाणगंगा, भूसा तिराहा, कोनी तिराहा, छतवई से होते हुए दिया पीपर होते हुए लेदरा और इसी प्रकार से नवाटोला चुहरी तक फर्राटे भरते नजर आए। यह सिर्फ हमारा कैमरा नहीं कह रहा है, अगर साहब को हमारी किसी बात से आपत्ति हो तो वह अपने लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल लें। बहरहाल हमारी गाड़ी, मोबाइल और तमाम कैमरों में पूरी घटना तो रिकॉर्ड है ही, कैसे गाड़ी और गाड़ी के आगे-पीछे चार पहिया वाहन, चार पहिया वाहन के पीछे दो पहिया वाहन, पूरी रेकी के साथ पूरी रात यह कारोबार होता रहा। यह रेकी पुलिस के डर से नहीं अपितु फॉरेस्ट के डर से रही। भला हो वन विभाग की मैडम का, इतना डर तो उन्होंने बनाया है कि उनकी टीम यूं ही घूमने भी निकल जाए तो सारी रात उत्खनन-परिवहन रुक जाता है। रात 10:30 से 2:30 तक लगभग 40 मिनी ट्रक फर्राटे भरते रहे और हर चौराहे में माफिया तैनात रहे।





हर चौराहे पर माफिया तैनात, बड़ी वारदात का इंतजार


इस बीच नए बस स्टैंड से लेकर लेदरा, चुहरी और नवाटोला तक हर चौक-चौराहे पर 4 से 6 माफिया तैनात रहे। आने-जाने वाले हर चार पहिया वाहन का नंबर माफियाओं द्वारा नोट किया जाता रहा। पूरी टीम, दलबल, 7 से 8 चार पहिया वाहन रेकी करते नजर आए। माफिया, माफिया के मुनीम, भाड़े के लड़के चौक-चौराहों में तैनात किए गए। शराब कबाब आती रही, ठहाके माफिया लगाते रहे, काम गुर्गे करते रहे। विधिवत दो गाड़ियां तीन घंटे तक हमारी गाड़ी की भी रेकी करती रहीं।


अधिकारी निवास पर भी तैनात रहे पहरेदार


कलेक्टर शहडोल के बंगले के बाहर, खनिज अधिकारी के निवास, खनिज निरीक्षक अभिषेक पटले के निवास, वन विभाग की डीएफओ के बंगले, रेंजर के निवास पर विधिवत एक-एक लड़के को तैनात किया गया। लेकिन सवाल यह है कि पुलिस अधीक्षक संजय अग्रवाल, एसपी, डीएसपी और विशेषतः थाना प्रभारी सोहागपुर, थाना प्रभारी गोहपारू के निवास और दोनों ही थाने के बाहर किसी प्रकार की कोई रेकी या कोई युवक हमें नहीं मिला। तो क्या इसका कारण यह है कि इन्हें अर्थात माफियाओं को पूरा भरोसा है कि यह अधिकारी हम पर कार्यवाही नहीं करेंगे, और जहां शंका है वहां तैनाती की गई है?





खनिज और वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल


बेशक खनिज और वन विभाग के अधिकारियों के निवास के सामने पहरेदार तैनात किए गए हैं सूचना के लिए। सूचना पल भर में जारी हो जाती है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि जैसे ही उनकी टीम कार्यवाही के लिए निकलती है अवैध उत्खनन-परिवहन पूर्णतया बंद हो जाता है। कम शब्दों में ऐसा कह सकते हैं कि यदि वन और खनिज की टीम अल्टरनेट गश्त करे तो यह पूरा सिस्टम धराशाई हो जाए। बहरहाल खनिज में स्टाफ की कमी और वन विभाग को पुलिस का कोऑपरेशन न मिलना, पूर्व में हुए हमले एक प्रमुख वजह तो है, लेकिन सफलता न मिलने से कोशिश छोड़ दी जाए यह भी नहीं होना चाहिए। सवाल यह भी है कि कलेक्टर, एसडीएम और खनिज विभाग की कार्यशैली क्या है, लेकिन इसकी चर्चा हम अभी के लिए रहने देते हैं।






वसूलीबाजों पर क्यों बरस रही साहबान की रहमत


अकेले हमारी टीम ने नहीं, कई अखबारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने प्रमुखता से अवैध उत्खनन प्रकाशित किया, जिसकी जानकारी एसपी अर्थात पुलिस अधीक्षक के सूचना संकलन और डीएसबी मुखबिर तंत्र के माध्यम से उन तक पहुंची तो होगी, लेकिन पूर्व की भांति इस बार कार्यवाही नहीं दिखी। और आलम यदि वही रहने वाले हैं तो फिर पपौंध और उमरिया भेजकर नाइंसाफी क्यों? नवाटोला में माफिया मनोज और उसके अन्य साथी, एवं लेदरा के आसपास विवेक व अन्य गुर्गे पूरी तरह से बेखौफ सक्रिय हैं। इन सब पर मेहरबान मोनू और कमांडो के साथ-साथ जिले में पदस्थ रहे बड़े-बड़े अधिकारियों के कार्यकाल की भी अब जिम्मेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। लेकिन बहुचर्चित कृष्णा भी कम नहीं, हर कोई उसी पुराने ढर्रे में काम कर रहा है। बस कहीं थाने को बाईपास करने में वसूलीबाजों को सफलता मिल चुकी है, तो कहीं कृष्णा, भूपेंद्र, आशीष जैसों की कशिश जारी है।


इनका कहना है

जिले में इस संबंध की जानकारी देने के लिए पुलिस महानिरीक्षक सुश्री चैत्रा एन मैडम को उनके दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु किन्हीं तकनीकी समस्याओं की वजह से उनसे फोन कनेक्ट न हो सका।

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