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यह कैसी संवेदनशीलता कि दो माह से 'दिया' तले अंधेरा ......?


शाम 7.50 में फैला अंधेरा...


मुखिया के दरबार मे पसरा अंधेरा,जिम्मेदारो को नही चिंता 


शहडोल ( कोबरा) : नगर पालिका शहडोल की समुचित व्यवस्था कि ढोल में कितना पोल है इस बात का अंदाजा शाम होते ही जिला मुख्यालय मे पसरे अंधेरे से लगाया जा सकता है। जिले के कोने-कोने से फरियादी अपनी फरियाद लेकर मुख्यालय पहुंचते हैं किंतु मुख्यालय में ही बीते 2 माह से विद्युत व्यवस्था विकलांग हो चुकी है और नगर पालिका प्रशासन है कि गहरी निद्रा में सोया हुआ है । दूरस्थ क्षेत्रों से जनसुनवाई मैं न्याय पाने के लिए मुख्यालय पहुंचे पीड़ितों को देर शाम होते ही रोशनी की किरण भी नसीब नहीं होती जिसका कारण है लाखो खर्च कर आजीविका कार्यालय के सामने लगाई गई सोलर लाइट की टूटी हुई तार है।जिस वजह से उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर छोड़कर सुलभ शौचालय के सामने सार्वजनिक वाहनों का इंतजार करना पड़ता है । गौरतलब है कि इन दिनों विधानसभा सत्र चल रही है इसके साथ ही प्रत्येक मंगलवार को जनसुनवाई वह अन्य कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने नगर पालिका अमला जिला मुख्यालय पहुंचता है फिर भी कथित अधिकारियों को देर शाम से ही कलेक्ट्रेट परिसर में पसरे सन्नाटे से कोई लेना देना ही नही । उल्लेखनीय है कि विद्युत व्यवस्था इलेक्ट्रिक पोल जो भी ठीक खनिज विभाग के सामने हैं कि गड़बड़ है किन्तु नगर पालिका द्वारा देर शाम तक विद्युत सप्लाई चालू ही नहीं की जाती । यह भी पसरे अंधेरे का एक मुख्य कारण है।

टूटी हुई तार ...


क्या साहब को भी नही खबर ....
जिले के मुखिया के दरबार में शाम होते ही घुप अंधेरा पसर जाता है जिसकी कीमत अदा करनी पड़ती है अपनी समस्या सुनवाई के लिए कलक्ट्रेट पहुंचे आमजन को । हालांकि कई बार नपा के जिम्मेदारों को कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया द्वारा इस समस्या से अवगत कराया गया था किंतु प्रतीत होता है कि कथित जिम्मेदार जानबूझकर अपना गुस्सा साहब के दरबार में निकाल रहे हैं। आलम यह है की खनिज विभाग का कार्यलय देर शाम तक खुले होने की वजह से माफियाओं का मुखबरी तंत्र इस अंधेरे में एक्टिव रहता है।

कैसी संवेदनशीलता कि नहीं उठता फोन..
मुख्य नगरपालिका अधिकारी अजय श्रीवास्तव द्वारा जितनी मशक्कत प्रभार पाने के लिए की गई थी यदि उसका 10% प्रयास भी व्यवस्थाओं को सुधारने में किया गया होता तो शायद आज बात कुछ और होती। नगर पालिका में पदस्थ यंत्री विजेंद्र वर्मा को इस बात की जानकारी भले ही काफी समय से है किंतु उनके द्वारा भी इस मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई वहीं मामले की जानकारी देने के लिए बीते 2 दिनों से मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्री श्रीवास्तव से दूरभाष में संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना भी उचित नहीं समझा। चर्चा तो यह भी है कि मैं पदस्थ नपा के साहब अपनी तिकड़ी के साथ अपना उल्लू सीधा करने में जुटे हुए हैं।




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