धनपुरी में नामजद इन ठिकानो में काटी जा रही सट्टा पर्ची कप्तान की मनाही के बाद बुढार वाले बड़े साहब के सेटिंग पर चल रहा धंधा..
पुलिस कप्तान ने जिले की कमान संभालते ही स्पष्ट आदेश जारी कर रखा है कि जिले में सट्टे का अवैध कारोबार किसी भी कीमत पर ‘टॉलरेट’ नहीं किया जाएगा, लेकिन कोयलांचल में कथित नेता पुस्सु सट्टे का जहर घोलने से बाज नहीं आ रहा है। वर्तमान में पुस्सु का नेटवर्क धनपुरी में 17 से अधिक और बुढार में लगभग दो दर्जन सटोरियों तक फैल चुका है, साथ ही अमलाई और बाकहो जैसे क्षेत्रों को मिलाकर करीब आधा सैकड़ा सटोरिये इसके इशारे पर काम कर रहे हैं। कहने को तो पुस्सु ने राजनीति का चोला ओढ़कर सट्टे से तौबा करने का पाखंड रचा है, लेकिन हकीकत यह है कि वह आज भी इस काले साम्राज्य का ‘किंगपिन’ है। सूत्रों की मानें तो सट्टे की इस काली कमाई से पुस्सु और उसका भाई हर महीने लगभग 50 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर रहे हैं, जबकि स्थानीय जिम्मेदारों का खास गुर्गा ‘अजय पल्सर धारी’ सिर्फ वसूली के नाम पर लाखों पीट रहा है।
रिजवान खान
शहडोल। जिले के पुलिस कप्तान जहाँ एक ओर अपराध मुक्त समाज की कल्पना लेकर दिन-रात पसीना बहा रहे हैं और जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग के ही कुछ जिम्मेदार अधिकारी कप्तान की साख पर बट्टा लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पुस्सु सटोरिया ने अपनी खादी और रसूख का ऐसा जाल बुना है कि स्थानीय अधिकारियों से लेकर कुछ जिम्मेदार साहबों तक चांदी के सिक्कों की नियमित पहुंच बनी हुई है। इसी अवैध ‘सेटिंग’ और संरक्षण का परिणाम है कि पुस्सु का काला कारोबार कप्तान की नजरों से बचकर बेखौफ फल-फूल रहा है। ये अधिकारी निजी स्वार्थ और भ्रष्टाचार के चलते सटोरियों को अभयदान दे रहे हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
बंद कमरे में पुस्सु का भाई और शातिर खाईवाली का नेटवर्क
कोयलांचल में सट्टे का यह धंधा किसी सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि एक बेहद शातिर और संगठित अपराधी सिंडिकेट की तरह चलाया जा रहा है। धनपुरी और बुढार की सड़कों पर घूमने वाले छोटे सटोरिये तो महज प्यादे हैं जो जनता से सट्टा पट्टी लेकर ‘एंट्री’ करते हैं, लेकिन इस खेल की असली ‘खाईवाली’ की कमान पुस्सु के भाई ने संभाल रखी है। पुस्सु का भाई अपने कुछ भरोसेमंद और शातिर गुर्गों के साथ किसी गुप्त और सुरक्षित बंद कमरे में बैठकर करोड़ों रुपयों की खाईवाली का हिसाब-किताब करता है। आधुनिक तकनीक और मोबाइल ऐप्स के जरिए चलने वाले इस अवैध खेल में पुस्सु का भाई मुख्य सूत्रधार है, जो स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे इस काले धंधे को नया विस्तार दे रहा है।
धनपुरी के चप्पे-चप्पे पर सक्रिय पुस्सु के सिपहसालार
धनपुरी क्षेत्र का कोना-कोना पुस्सु के सट्टा कारोबार की जद में है। यहाँ मेन मार्केट चौराहा पर राजकुमार, ज्वालामुखी रोड पर मुल्लू और संतोष जैसे पुराने खिलाड़ियों का कब्जा है। जाकिर गट्टा 4 नंबर क्षेत्र में, जबकि भूरा और शकील कच्ची मोहल्ला जैसे संवेदनशील इलाकों में सट्टे का जाल फैलाए हुए हैं। इतना ही नहीं, कब्रिस्तान रोड पर दीपक, इमामबाड़ा के पास राजा और माइकल चौक पर नवाब जैसे सटोरिये सक्रिय हैं। वहीं बिलियस नंबर एक में तबरेज, आजाद चौक पर मंगई लल्ला, रंग मंच पर शंकर और पानी टंकी के पास अच्छेलाल जैसे सटोरिये पुस्सु के इशारे पर खुलेआम पट्टियां काट रहे हैं। इन सभी को स्थानीय स्तर पर मिलने वाले संरक्षण ने इतना बेखौफ बना दिया है कि इन्हें न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन की कार्रवाई का।
‘जिम्मेदारों’ का आदमी अजय पल्सर धारी और लाखों की वसूली
इस पूरे अवैध कारोबार में स्थानीय ‘जिम्मेदारों’ (वर्दी और सिस्टम वाले) ने अपने हितों को साधने के लिए एक खास आदमी को लगा रखा है, जिसे क्षेत्र में ‘अजय पल्सर धारी’ के नाम से जाना जाता है। यह अजय पुस्सु का गुर्गा नहीं, बल्कि खाकी और सिस्टम के ‘जिम्मेदारों का आदमी’ है। अजय का काम हर हफ्ते अपनी पल्सर बाइक से सट्टा ठिकानों पर दस्तक देकर साहबों के नाम पर हफ्ता वसूली करना है। सूत्रों के हवाले से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, धनपुरी में सक्रिय सटोरियों से यह पल्सर धारी अजय जिम्मेदारों के लिए हर महीने लगभग 1.5 से 2 लाख रुपये की वसूली कर रहा है। वहीं, सट्टा किंग पुस्सु ने बुढार क्षेत्र के ‘बड़े साहब’ को डायरेक्ट मैनेज करने की जिम्मेदारी खुद संभाल रखी है। इस तगड़ी सेटिंग के दम पर पुस्सु और उसका भाई हर महीने सट्टे की काली कमाई से लगभग 50 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
बुढार में सटोरियों का बड़ा नेटवर्क और पुस्सु की शतरंज
पुस्सु की शतरंज की चालें धनपुरी के बाद अब बुढार थाना क्षेत्र में भी अपनी जड़ें गहरी कर चुकी हैं, जहाँ एक दर्जन से अधिक सटोरियों का एक बड़ा नेटवर्क ऑपरेट कर रहा है। शातिर पुस्सु ने खुद को बचाने के लिए उन तीन-चार लोगों को जानबूझकर हाईलाइट कर रखा है जो कभी उसके गुर्गे हुआ करते थे, ताकि कार्रवाई की गाज उन पर गिरे और वह खुद सुरक्षित रह सके। बुढार में भूपेंद्र जैसे कुछ नाम भी चर्चा में हैं जो इस साठगांठ का हिस्सा बताए जाते हैं। बुढार के यह सटोरिये समाज के लिए दीमक की तरह साबित हो रहे हैं जो युवाओं को सट्टे के जाल में फँसा रहे हैं। खबर अभी बाकी है! हमारे अगले अंक में हम खुलासा करेंगे कि बुढार के वे कौन से विशिष्ट ठिकाने और चेहरे हैं जो इस काली शतरंज के मुख्य मोहरे बने हुए हैं।

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