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बाघों के साम्राज्य से उड़ती खबरें... नए डीडी ने नहीं संभाली दुकान तो पुराने डीडी के वसूली के गल्ले में बैठे सहायक छोटे साहब

 


डीडी का सिस्टम जिंदा रखने छोटे साहब अपने सारथी के साथ उतरे मैदान में कर रहे वसूली

मीडिया हब शहडोल 

शहडोल/उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इन दिनों भ्रष्टाचार की जड़ों ने ऐसा जाल बिछाया है कि ईमानदार अधिकारियों के आने के बाद भी लूट-खसोट का पुराना सिस्टम बदस्तूर जारी है। पुराने 'वसूलीबाज' साहब की विदाई के बाद उनके द्वारा तैयार किए गए अवैध तंत्र और वसूली के उस खूंखार नेटवर्क को अब 'छोटे साहब' ने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है। नए और ईमानदार अधिकारी की आंखों में धूल झोंककर यह सिंडिकेट आज भी उसी बेखौफ अंदाज में काम कर रहा है।

इन छोटे साहब का विवादों, कारनामों और दागदार अतीत से बहुत पुराना नाता रहा है। मातहतों के साथ गाली-गलौज करना और पद की धौंस जमाना इनकी पुरानी फितरत है। अब ये महाशय अपने एक खास सारथी (चालक) के साथ मिलकर बांधवगढ़ के हरे-भरे जंगलों में जमकर सेंध लगा रहे हैं। भ्रष्टाचार और लीपापोती का आलम यह है कि पूर्व प्रबंधन के समय जिन कागजी कार्यों का बिना किसी भौतिक सत्यापन के ही धड़ल्ले से भुगतान करा लिया गया था, अब जांच की आंच और अपनी गर्दन बचने के लिए रातों-रात उन पुराने कामों को धरातल पर अंजाम दिया जा रहा है। वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा ताक पर है और यह जोड़ी सिर्फ अपना खजाना भरने में मस्त है।

भ्रष्टाचार की भूख इस कदर हावी है कि बेरोजगारों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। विभाग में भर्ती और प्रशिक्षण के नाम पर करीब 10 युवाओं से 10-10 हजार रुपये की अवैध वसूली का खुला खेल चल रहा है। हद तो तब हो गई जब सरकारी नियमों के तहत एक महीने तक चलने वाले प्रशिक्षण को भ्रष्टाचार की भट्टी में झोंकते हुए महज सात दिनों में निपटाने की तैयारी कर ली गई। बिना किसी का नाम लिए इस पूरे नेटवर्क ने बांधवगढ़ को अपनी जागीर समझकर लूट का खुला खेल रच दिया है।

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