खनिज और पर्यावरण के कायदों को रसूकदार क्रेशर संचालक बता रहा धता
गजेन्द्र सिंह परिहार
गजेन्द्र सिंह परिहार
इन्ट्रों: पर्यावरण को संरक्षित रखने ढ़ेरो कायदे बनाये गये है लेकिन कायदों का पालन जमीनी स्तर पर न दिखकर सिर्फ कागजो तक ही सीमित दिख रहा है साथ ही रसूकदार क्रेशर संचालक द्वारा जैतपुर के समीप बोदाटोला मे खनिज के कायदों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है और जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए है। जिसका खामियाजा स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है।
शहडोल: शहडोल जिले के जैतपुर के समीप ग्राम बोदाटोला जहां जानकारी के अनुसार लगभग 25 हजार की आबादी निवास करती है उक्त स्थान पर स्थानीय रसूकदार सागर सोनी द्वारा टेकरी (डोंगरिया) पर क्रेशर संचालन किया जा रहा है जहां खनिज और पर्यावरण के कायदों को धता बताते हुए हैवी ब्लांस्टिंग कर बोल्डर निकाले जा रहे है और रसूकदार का रसूक मामले मे इस कदर हाबी है कि कार्यवाही के नाम पर जिम्मेदार जांच की जहमत भी नही उठा रहे है हालांकि तत्कालीन कलेक्टर ललित दाहिमा के कार्यकाल में कार्यवाही की जानकारी खनिज विभाग शहडोल द्वारा दी गई है किन्तु वर्तमान मे क्रेशर से उड़ रहे डस्ट से परेशान ग्रामीणों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं
डस्ट और ब्लांस्टिंग से ग्रामीण परेशान
हमारी टीम जब स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ग्राम बोदाटोला पहुंची तो ग्रामीणों ने रसूकदार के रसूक के डर से नाम न बताने की शर्त पर बताया कि 24 घण्टे बदस्तूर क्रेशर का संचालन किया जाता है जिसकी धूल की बजह से आम रास्ते से जो कि क्रेशर से लगा हुआ है आवागमन परेशानियों का सबब बन जाता है इतना ही नही रात के समय बिना किसी पूर्व सूचना के डोंगरिया मे बारूद ब्लास्ंिटग की बजह से कच्चे घरों के छपरे एवं दिवारे हिलने लगती है तो नींद मे सो रहे छोटे बच्चे भी ब्लास्ंिटग से भयभीत हो जाते है बारूद के धमाके के साये के तले गांव के बच्चे डरे सहमे रहते है इसके अलावा डोंगरी मे निवास करने वाले जीव-जन्तु ब्लास्ंिटग की बजह से गांव की ओर पालायन करते है जिससे जंगली जानवरो से शिकार का भय भी बना रहता है
खनिज के नियमों का नही पालन
जानकारी के अनुसार क्रेशर संचालक द्वारा खनिज के कायदो का पालन नहीं किया जा रहा है साथ ही लीड क्षेत्र से हटकर अधिक गहराई तक क्रेशर संचालक द्वारा खनन किया जाना भी बताया जाता है इसके अलाबा हैबी ब्लांस्टिंग की अनुमति न होने के बाद भी डीजीएमएस को मुंह चिढ़ाते हुए संचालक द्वारा गहराई तक बारूद डालकर बोल्डर निकालने हेतु बिना किसी पूर्व सूचना के की जाती है खादान में फंेसिंग एंव अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को पूर्णतः अभाव है मूनारा, सूचना पटल बोर्ड ब्लांस्टिंग की सूचना, मुनादी, थाने मे सूचना, बारूद के रख रखाव सम्बन्धी जानकारी व अन्य खनिज कायदों की धज्जियां क्रेशर संचालक द्वारा उड़ाई जा रही है
पर्यावरण कायदो की उड़ी धज्जियां
क्रेशर प्रारंभ करने से पूर्व ही क्रेशर संचालक को शहडोल स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय से एनओसी लेनी होती है जिसमें साफ तौर पर इस बात को उल्लेख होता है कि क्रेशर मे तीन ओर से बाॅन्डीबाॅल अनिवार्य होती है साथ ही क्रेशर के चारो ओर प्रतिवर्ष वृहद पैमाने पर वृक्षारोपण करना होता है जिस स्थान से धूल आबादी वाले क्षेत्र पर जाये उसे बाउन्ड्रीवाॅल से कवर करना होता है साथ ही डस्ट का प्रभाव आस-पास के क्षेत्रो मे न पड़े इस हेतु स्प्रिंकल्स लगवाने भी अनिवार्य होते है जिनका क्रेशर व उसके आस-पास नामो निशान तक नहीं मिला कम शब्दों मे कहे तो क्रेशर संचालक द्वारा पर्यावरण कायदों की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही है जिस पर पर्यावरण विभाग की नजर नही पड़ रही है।
डैंम पर पड़ सकती है दरार
जिस स्थान पर क्रेशर का संचालन किया जा रहा है उस स्थान से महज कुछ ही दूर 6 करोड़ की लागत से सिंचाई विभाग द्वारा नेहरू डैंम का निर्माण करवाया गया है जानकारों की माने तो लगातार हो रहे हैबी ब्लास्ंिटग से कभी भी डैंम मे दरार आ सकती है जिससे न सिर्फ शासन को 6 करोड़ रूपये की लागत राशि का नुकसान होगां अपितु डैंम मे दरार से आस-पास के ग्रामों के सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित होगी इतना ही नही क्रेशर से निकलने वाला डस्ट सीधे तौर पर डैंम मे जा रहा है जिससे डस्ट युक्त पानी से कृषि कार्यो मे भी प्रभाव पड़ रहा है।
अन्य क्रेशरो का भी एक सा हाल
बोदाटोला में क्रेशर संचालक द्वारा नियमो के विरूद्ध क्रेशर संचालन का मामला कोई नया नही है आसपास के क्षेत्रो मे संचालित क्रेशर नियमों को धता बताकर संचालित हो रहे है फिर चाहे बात शहडोल गोहपारू मुख्य मार्ग मे संचालित कृष्णा तिवारी मेसर्स की पत्थर खदान मे अनिमितताओं कि करे या प्राकृतिक नहर के बगल में संचालित कंल्याण मोबाइल क्रेशर अथवा देवगढ़ मे जलाशय के समीप संचालित अंकित जैन के क्रेशर की हाल सबके एक जैसे है तो वहीं खन्नौदी के समीप मलमाथर की डोगंरिया मे कायदो को धता बताते हुए संचालित महेन्द्र तिवारी के पत्थर खदान मे भी जांच एवं कार्यवाही की आवश्यकता है।
इनका कहना है
क्रेशर के एनओसी एवं अन्य समस्त जानकारियां मेरे भाई सौरभ सोनी से मिल सकेगी मै अभी व्यस्त हूं आपसे बाद मे बात करूंगा।
सागर सोनी
क्रेशर संचालक
जानकारी आपके माध्यम से संज्ञान में आई है टीम भेजकर क्रेशर एवं खदान की जांच जल्द ही कराई जायेगी। (हालाकि यह वर्जन पुराना है लेकिन जांच अब तक लंबित है.. प्रतीत होता है साहब बिके है)
प्रमोद शर्मा
जिलाखनिज अधिकारी शहडोल

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