प्रषासनिक मिलीभगत की हो जांच, तहसीलदार और बडे माफियाओं के मोबाईल रिकॉड जाये खंगाले
नाखून काटकर सहादत मनाने कि तर्ज पर जिला प्रषासन छोटी-छोटी मात्रा में रेत जप्त कर अपनी पीठ थप-थपाने का कार्य कर रहा है। लेकिन बहुचर्चित तहसीलदार और डेविड जैसे बडे माफिया जांच की जद से बाहर है जनप्रतिनिधियों और राजनेताओं ने भी मामले से दूरी बनाई हुई है पटवारी हत्याकांड मामले में उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर बडे माफियाओं प्रषासनिक मिली भगत की जांच कराने की मांग ब्यौहारी नगर परिषद अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता श्रीकृष्ण राजन गुप्ता ने मीडिया के माध्यम से की है।
शहडोलः मतगणना को कुछ ही दिन शेष है अगर मृत पटवारी प्रसंन सिंह बघेल जीवित होते तो शहडोल पॉलीटेक्निक ग्राउंड में सायद वे भी मतगणना में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहें होते खैर उन्होंने अपने दायित्व का निर्वहन करते हुये बडे़ अधिकारियेां के आदेष पर अपनी कुर्बानी दे दी। और अब जिला प्रषासन के आला अधिकारी मामले में कोरम पूर्ति करते हुये मतगणना के बहाने ही मामले को ठंडे बस्ते के हवाले करने के प्रयास में जुटे हुये प्रतीत हो रहे है। ऐसा नहीं है कि कार्यवाहियां नहीं हुई लेकिन रात के अंधेरे में बीना फोर्स पटवारी को तहसीलदार ने क्यों भेजा वसूली को लेकर दिलीप शर्मा क्यों चर्चो में है, अवैध खदान का संचालन किस बडे़ माफिया द्वारा किया जा रहा था जैसे सवाल पर मानों प्रषासन ने भी चुप्पी साधने की ठान ली है।
पटवारी परिजनों को मिले लाभ: राजन
सोषल मीडिया में कहने को तो कई राजनीति के जोधाबली मौजूद है तो धरातल पर कितने बड़े वारदात के बाद भी सबने चुप्पी साध रखी है तो वहीं ब्यौहारी नगर परिषद अध्यक्ष राजन गुप्ता ने सामने आकर मीडिया के माध्यम से अपील करते हुये बताया कि मृत पटवारी या यू कहें कि आदेष पालन कराते शहीद हुये पटवारी के परिजनों को शासकीय नौकरी सहित शहीद जवान को मिलने वाली तमाम सेवायें मुहैया कराई जानी चाहिए साथ ही पटवारी हत्याकांड मामले में डेविड जैसे बडे़ माफियाओं और राजस्व विभाग के वे जिम्मेदार अधिकारी जिनके इसारे पर बडे़ पैमाने में अवैध उत्खनन चल रहा था। कि उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर सीडीआर एवं मोबाईल रिकॉड खगालते हुये दोषियों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिये ताकि भविष्य में कभी ऐसे वारदात कि पुर्नावृत्ति न हो।
बिना पुलिस क्यों भेजा गया पटवारी दल
सवाल यह भी उठता है कि जब लगातार दो दिनों से क्षेत्र में अवैध उत्खनन कि कार्यवाही हो रही थी तो फिर रात के अंधेरे में ऐसी क्या मजबूरी फसी की पटवारियों के दल को बिना स्थानीय पुलिस को इंफार्म किये बिना पुलिस बल लिये अवैध रेत खदान में भेजना पड़ा। जबकि पूर्व में उल्लेखित क्षेत्र में माफियाओं द्वारा बंदूक के बट तोडने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है। तो वहीं सवाल यह है कि बिना आग धुआ तो निकलता नहीं ऐसे में वैसे तो नायब तहसीलदार, तहसीलदार एवं एसडीएम जैसे कई अधिकारी राजस्व विभाग में लेकिन आरोप सिर्फ सतना से शहडोल पहुंचे नायब तहसीलदार दिलीप शर्मा पर ही क्यों लग रहें है। तो चर्चा का विषय यह भी है कि मउ के वे कौन पंडित जी है जिन्होंने तीन दिन पहले तक वाहन स्वामियों से कथित साहब के नाम पर वसूली की थी।
बडे़ माफियाओं पर आखिर कार्यवाही कब
जब भी किसी अवैध खदान का संचालन प्रारंभ होता है तो उसमें बडे माफियाओं की भागीदारी होती है माफिया स्थानीय प्रषासन को मैनेज करता है इसके अलावा हाइवा, पोकलेन एवं घाट तक पहुंच मार्ग रैम तथा मैनुअल लोडिंग के लिए मजदूरों कि व्यवस्था करने की जिम्मेदारी कथित अघोषित ठेकेदार कम माफिया कि होती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बहुचर्चित माफिया डेविड द्वारा अपने पार्टनर के साथ मिलकर चुनाव की दृष्टि से पर्दे के पीछे रहते हुये गुर्गो के माध्यम से अवैध खदान का संचालन कराया जा रहा था और रेत उत्तर प्रदेष और रीवा विभिन्न जिलों कि ईटीपी के आधार पर भेजी जा रही थी। तो वही वसूली का जिम्मा अधिकारियों ने अपने मातहतो और गुर्गो को दिया था वहीं इस मामले में सिर्फ कार्यवाही टैªक्टर चालक तक ही सीमित रह गई जो कि मृत पटवारी के परिवार के लिए अधूरी न्याय सा प्रतीत हो रहा है। मामले में नपा अध्यक्ष राजन गुप्ता ने चर्चित माफिया डेविड कि खदान संचालन व वारदात में भागीदारी की जांच करने की अपील की है।
इनका कहना है
तहसीलदार अथवा पटवारियों के दल हेतु पुलिस विभाग से बल अथवा फोर्स की मांग नहीं की गई थी यदि बल मांगा जाता तो निष्चिततौर पर पुलिसकर्मी साथ जाते।
कुमार प्रतीक
पुलिस अधीक्षक, शहडोल





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