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​वसूली का 'संजय' कनेक्शन: ट्रैफिक जाम से बेहाल शहडोल, नो-एंट्री में दौड़ रहे लाखों के 'नजराने'


​शहडोल के चौराहों पर ट्रैफिक त्राहिमाम, विभाग में 'वसूली भाईजान' और 'छोटा संजय' की रस्साकशी


शादी ब्याह का सीजन चल रहा है और नगर की यातायात व्यवस्था ठप हो चुकी है। ऐसे में घर से निकला आम आदमी हर चौराहे में जाम में फँस जा रहा है, मैरिज गार्डन के सामने तो एंबुलेंस का जाम में फंसा अब आम हो चुका है आम आदमी का मिनटों का काम घंटों में हो रहा है। लेकिन यातायात विभाग के अधिकारियों के कान में जूं भी नहीं रेंग रही है। बताया जाता है कि विभाग में अलग-अलग वसूलीबाज अपना-अपना उल्लू सीधा करने में व्यस्त हैं। मिट्टी, रेत हो या गिट्टी की गाड़ी, सभी पर ₹5,000 महीने की दिहाड़ी लादी जा रही है, जिसमें आला अधिकारी धृतराष्ट्र बन गए हैं। वर्षों से यातायात में पदस्थ संजय और दूसरी ओर यातायात के दूसरे वसूली भाईजान, दोनों अपने-अपने तरीके से विभाग में रस्साकशी मचाए हुए हैं। बेशक मिट्टी, रेत और गिट्टी परिवहन करने वाली गाड़ियाँ कम हुई हैं, लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था चौपट हो चुकी है।



रिजवान खान


शहडोल। नगर के राजेंद्र टॉकीज चौराहे की बात की जाए या बात की जाए गांधी चौक की, या फिर स्टेशन रोड में लगता जाम हो, ऐसा लगता है मानो विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को तिलांजलि दे चुके हैं। वे सिर्फ बड़ी कमर्शियल गाड़ियों को ‘गिनने’ और अपना उल्लू सीधा करने में इस कदर मस्त हैं कि उन्हें यह दिखता ही नहीं कि जनता किस कदर त्रस्त है। शाम 6ः00 बजे से लेकर 9ः00 बजे तक जब शहर का हाल बेहाल होता है, तब शहडोल की यातायात पुलिस नदारद होती है। या फिर इन्हें सिर्फ ऐसी जगह पर देखा जाता है जहाँ ट्रैफिक कम हो। ऐसा नहीं है कि यातायात पुलिस अपना काम नहीं कर रही है, पर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शहडोल की यातायात पुलिस अपने मूल दायित्व से भटककर यातायात व्यवस्था सुरक्षित करने के स्थान पर अपनी निजी उद्देश्यों की पूर्ति में लग गई है।



पांडव नगर में रोज लगता है जाम


शहर के पांडव नगर क्षेत्र में संचालित प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूल की छुट्टी के समय प्रतिदिन विकराल यातायात जाम की स्थिति बन जाती है। इस समस्या के कारण, जहाँ छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को घंटों जाम में फँसे रहना पड़ता है, वहीं उन्हें लेने आने वाले अभिभावक भी भारी परेशानी का सामना करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों के अनुसार, जैसे ही कॉन्वेंट स्कूल की छुट्टी होती है, पांडव नगर रोड पर स्टेट बैंक और स्मार्ट प्वाइंट के पास वाहनों का एक बड़ा जमघट लग जाता है। सड़क की चौड़ाई अव्यवस्थित पार्किंग की वजह से कम होने और बड़े वाहनों के अव्यवस्थित ढंग से खड़े होने के कारण कुछ ही मिनटों में पूरी सड़क अवरुद्ध हो जाती है। इस दौरान, बच्चों को सुरक्षित घर पहुँचाने की जल्दी में लगे इन वाहनों के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है। अक्सर स्कूली बच्चों को इस जाम से निकलने में आधे से एक घंटे तक का समय लग जाता है। अभिभावकों ने बताया कि यह केवल यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि घंटों जाम में फँसे रहने के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।


गांधी चौक पर हर घंटे जाम


शहडोल शहर के सबसे व्यस्त और हृदय स्थल माने जाने वाले गांधी चौक पर शाम 5 बजे के बाद यातायात जाम की समस्या एक रोज़मर्रा का सिरदर्द बन चुकी है। यह चौराहा शहर की कई मुख्य सड़कों को जोड़ता है, जिसके कारण शाम के समय यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन यातायात व्यवस्था संभालने वाले कर्मियों की लापरवाही और अनुपस्थिति इस समस्या को और भी गंभीर बना देती है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, शाम 5 बजे से लेकर देर रात तक हर घंटे गांधी चौक पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। अक्सर देखने में आता है कि जाम लगने के बावजूद यातायात पुलिस के जवान मौके पर मौजूद नहीं होते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई बार ट्रैफिक पुलिस के जवान चौक के पास या आसपास मौजूद होते हैं, लेकिन वे जाम की स्थिति को देखने के बाद भी तुरंत उसे नियंत्रित करने के लिए आगे नहीं आते। उनकी निष्क्रियता के कारण छोटे-मोटे जाम देखते ही देखते एक बड़ी बाधा में बदल जाते हैं, और वाहन चालकों तथा राहगीरों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।




नो एंट्री में बेधड़क दौड़ते हैं बड़े वाहन


शहडोल शहर की मुख्य सड़कों और रिहायशी इलाकों में नो-एंट्री के सख्त नियम होने के बावजूद, रेत, गिट्टी (पत्थर), और मिट्टी लेकर आने वाले भारी मालवाहक वाहन दिन-रात बेखौफ घूम रहे हैं। नियम विरुद्ध तरीके से नगर के अंदर इन बड़े वाहनों के प्रवेश से जहाँ सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था खतरे में है, वहीं यातायात पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के नागरिकों का कहना है कि भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री का समय निर्धारित है, विशेषकर दिन के समय या व्यस्ततम घंटों में। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में डंपर और ट्रक इन नियमों को धत्ता बताते हुए शहर के अंदरूनी मार्गों का उपयोग करते हैं। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब ये वाहन स्कूल और बाज़ार के समय पर मुख्य सड़कों से गुज़रते हैं। इन अनियंत्रित भारी वाहनों के कारण आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, खासकर दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए। स्थानीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि यातायात पुलिसकर्मी इन नियमों के उल्लंघन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते हैं। कई बार तो पुलिसकर्मी ड्यूटी पर होते हैं, लेकिन वे इन बड़े वाहनों को अनदेखा करते हुए अपने अन्य कामों में व्यस्त रहते हैं।




छोटे कर्मचारी का बड़ा मैनेजमेंट


शहडोल के यातायात विभाग में एक छोटे कर्मचारी के ‘वर्चस्व’ और विभाग के ‘इनडायरेक्ट मैनेजमेंट’ को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग के एक मामूली से कर्मचारी, जिसे श्छोटा संजयश् के नाम से जाना जाता है, पर यह आरोप है कि वह विभागीय कार्य से इतर एक बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का नेटवर्क चला रहा है। ‘छोटा संजय’ नाम का यह कर्मचारी कथित तौर पर दिन-रात सड़कों पर रहकर छोटे-बड़े वाहन चालकों की रेकी करता है। इन वाहनों को सीधे विभाग के आला अधिकारियों की श्खास डायरीश् में दर्ज किया जाता है। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि इस ‘रजिस्ट्रेशन’ के एवज में प्रत्येक वाहन से प्रतिमाह ₹5,000 से ₹8,000 तक का ‘नजराना’ लिया जाता है। इस लेन-देन को अधिकारी ‘डायरेक्ट वसूली’ कहने से बचते हैं और इसे ‘इनडायरेक्ट’ या ‘मैनेजमेंट चार्ज’ का नाम देते हैं। यातायात विभाग पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, यह आवश्यक है कि वरिष्ठ अधिकारी इस ‘छोटे कर्मचारी के बड़े वर्चस्व’ की तत्काल और निष्पक्ष जाँच कराएँ, ताकि यातायात व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जा सके और जनता के बीच विभाग की छवि सुधर सके।

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