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किसने सौंपी कृष्णा को अवैध रेत की कमान.. क्या वर्दीधारी बने माफिया!!



तो क्या वर्दीधारियों और प्रशासन की शह पर गुलज़ार जैतपुर में अवैध रेत खदानें


ढलती शाम के साथ ही शुरू हुआ रेत माफियाओं का तांडव, बेखौफ गरज रही हैं जेसीबी मशीनें।


खनिज विभाग, पुलिस, एसडीएम और तहसीलदार की रहस्यमयी चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल।

 


शहडोल : जिले के जैतपुर में ढलती शाम के साथ ही अवैध रेत खदानें एक बार फिर गुलजार हो जाती हैं। सूरज ढलते ही चारों प्रमुख अवैध खदानों में जेसीबी मशीनों की गरज सुनाई देने लगती है और रेत की लोडिंग का काला कारोबार अपने चरम पर पहुंच जाता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो सरकारी माफिया ने जैतपुर में पूरी कमान संभाल ली है और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। हर शाम शुरू होने वाला यह खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

जानकारी के बाद भी नहीं कार्रवाई


जिले का खनिज विभाग, एसडीएम और तहसीलदार सब कुछ जानकर भी अनजान बने बैठे हैं। कागजों पर तो सिटी टास्क फोर्स की बड़ी-बड़ी कार्रवाइयां दिखाई जा रही हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। अधिकारी सिर्फ 'इसकी टोपी उसके सर' करने का शर्मनाक प्रयास कर रहे हैं। करोड़ों के राजस्व की चपत लगाकर माफिया अपनी जेबें भर रहे हैं और पूरा प्रशासनिक अमला खुद को पंगु साबित कर रहा है। जानकारी और प्रामाणिक खुलासे होने के बावजूद कोई लगाम नहीं लगाई जा रही है, जिससे यह साफ होता है कि इस महाखेल को उच्च अधिकारियों की भी मौन सहमति प्राप्त है।

थाना प्रभारी के संरक्षण की चर्चा


जैतपुर में यह चर्चा आम है कि क्या यह पूरा अवैध रेत कारोबार थाना प्रभारी के सीधे संरक्षण में चल रहा है? जिस तरह से बेखौफ होकर यह सिंडिकेट संचालित हो रहा है, उससे तो यही लगता है कि खाकी वर्दी ही इस खेल की असली कप्तान है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और खुलेआम गुंडा टैक्स व अवैध वसूली का साम्राज्य स्थापित हो जाए, तो सरकारी खजाने की लूट पर अंकुश लगाना नामुमकिन है। पुलिस, खनिज और राजस्व विभाग का यह नापाक गठजोड़ इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि पूरा सिस्टम ही इस काली कमाई की चाशनी में आकंठ डूब चुका है। चर्चा यह भी है की इस पूरे कारोबार को स्थानीय जनप्रतिनिधि के नाती का संरक्षण मिला है जिसका भी हिसाब किताब प्रतिदिन के हिसाब से हो रहा है। 


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