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क्या मैनेजमेंट के आगे नतमस्तक है उमरिया कलेक्टर ओर खनिज अधिकारी!!


क्या ईमानदारी की लगाई गई बोली... और अवैध नियम विरुद्ध खनन की दे दी गई अनुमति

कार्यवाही पर पड़ रही भारी... दिनेश की यारी!!

DP का जुगाड़, वैध का आड़.. कही की टीपी कही खेल!! चंदिया में ज्ञापन को नजर अंदाज


 उमरिया और शहडोल जिले की जीवनदायिनी नदियों का सीना इन दिनों रेत माफियाओं द्वारा छलनी किया जा रहा है। बाबा महाकाल और धनलक्ष्मी जैसी बेलगाम ठेका कंपनियां पोकलेन मशीनों से नदियों का भौगोलिक स्वरूप बिगाड़ने पर तुली हैं। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और पूरा प्रशासनिक अमला कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। चंदिया में पूर्व में हुई दिखावटी जब्ती की फाइलें सफेदपोशों के दबाव में दफन कर दी गई हैं, जिससे सिस्टम की नीयत पूरी तरह संदिग्ध हो चुकी है। अब आक्रोशित जनता ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


शहडोल। रेत के काले कारोबार ने अब जिले की सीमाओं को लांघकर पूरे संभाग में अपनी जड़ें जमा ली हैं। लगातार मिल रही शिकायतों और जनता के उग्र प्रदर्शनों के बावजूद सिस्टम के हुक्मरान किसी बड़े हादसे या मानसून का इंतजार कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जनता द्वारा दिए जा रहे ज्ञापन प्रशासन के लिए सिर्फ रद्दी का कागज बनकर रह गए हैं। माफियाओं का खौफ इस कदर हावी है कि वन क्षेत्र के कोर और बफर जोन में भी हैवी मशीनें गरज रही हैं। इस खुली लूट और फर्जी टीपी (ट्रांजिट पास) के खेल ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है।


नदियों के प्राकृतिक ढांचे से खिलवाड़


बाबा महाकाल और अन्य रेत ठेका कंपनियों ने चंद पैसों की लालच में नदियों के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। दिन-रात पोकलेन और एलएनटी जैसी भारी मशीनों से पानी के अंदर से रेत निकाली जा रही है, जिससे नदी का बहाव और भौगोलिक स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाए गए एनजीटी के सख्त नियम इन माफियाओं के रसूख के आगे बौने साबित हो रहे हैं। प्रशासन की आंखों के सामने यह तबाही मची है, लेकिन कोई भी अधिकारी इन पर नकेल कसने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।


ठंडे बस्ते में गई चंदिया की जब्ती फाइल


चंदिया की उमरार नदी में पूर्व में खनिज विभाग द्वारा की गई जब्ती की कार्यवाही महज एक दिखावा साबित हुई है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि किसी रसूखदार सफेदपोश के भारी दबाव के चलते उस जब्ती की फाइल को हमेशा के लिए दफन कर दिया गया है। लगातार हो रहे धरने, प्रदर्शन और शिकायतों का कोई असर प्रशासन की मोटी चमड़ी पर नहीं पड़ रहा है। जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर वह कौन सी अदृश्य शक्ति है, जो इन रेत माफियाओं को खुलेआम अभयदान दे रही है और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जा रही है।


ब्लैकलिस्टिंग से क्यों कांप रहे जिम्मेदारों के हाथ


अवैध उत्खनन, फर्जी टीपी का खेल और नियम विरुद्ध संचालन सरेआम सिद्ध हो चुका है, इसके बावजूद ठेका कंपनियों की लीज निरस्त करने में प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। जिला प्रशासन और खनिज अमला इन मनमानी करने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की बजाय उन्हें मूक समर्थन दे रहा है। यह मिलीभगत इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि व्यवस्था पूरी तरह से माफियाओं की मुट्ठी में कैद हो चुकी है। बिना भौतिक सत्यापन के रेत के बड़े-बड़े डंप तैयार किए जा रहे हैं और सिस्टम तमाशबीन बना हुआ है।


आक्रोशित ग्रामीणों ने फूंका बगावत का बिगुल


माफियाओं के आतंक और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ अब चंदिया की जनता का आक्रोश ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर तहसीलदार को एक बार फिर ज्ञापन सौंपा है और इस काले खेल के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही इन बेलगाम मशीनों को नदियों से बाहर नहीं निकाला गया और ठेकेदारों पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। अब देखना होगा कि जनता के इस अल्टीमेटम के बाद भी क्या प्रशासन अपनी नींद से जागेगा?


इनका कहना है


जानकारी आपके माध्यम से संज्ञान में आई है, हम दिखवाते हैं उचित कार्यवाही की जायेगी।

डॉ विद्याकांत तिवारी

खनिज अधिकारी, शहडोल

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