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धनपुरी सीएमओ पूजा बुनकर का विवादित रहा इतिहास: क्या तबादले के बाद भी यहां दोहराया जाएगा पुराना खेल?



क्या सिवनी और करेली की तरह अब धनपुरी की जनता को भी झेलना पड़ेगा कथित अफसरशाही और मनमानी का दंश?

पीएमओ, ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त तक शिकायतों का हवाला: जांच में दोषी पाए जाने के दावों के बावजूद फील्ड पोस्टिंग का इनाम क्यों?

दस्तावेजों में दर्ज आरोपों के अनुसार: चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने और महत्वपूर्ण फाइलों पर कब्जे का क्या है सच?


शहडोल (डेस्क) : क्या मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तबादला आदेशों की अहमियत पर सवाल खड़े हो रहे हैं? प्राप्त शासकीय आदेश दिनांक ३ जून २०२६ के अनुसार, धनपुरी नगर पालिका की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पूजा बुनकर का स्थानांतरण अनूपपुर जिले की नगर परिषद बनगवां कर दिया गया है। लेकिन जन शिकायतों और स्थानीय चर्चाओं के हवाले से यह आरोप लगाया जा रहा है कि तबादले के बाद भी सीएमओ का धनपुरी से मोहभंग नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद से ही अधिकारी कथित तौर पर लापता हैं। शिकायतों के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि नगर पालिका की मूलभूत सुविधाओं और पेयजल से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें उनके पास ही हैं, जिससे निकाय के कार्य ठप पड़े हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या स्थानांतरण रुकवाने का कोई जुगाड़ चल रहा है या फाइलों में कथित गड़बड़ियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है?

**क्या चहेते ठेकेदार के साथ कथित गठजोड़ के आरोप सच हैं?**

क्या धनपुरी में किसी विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का खेल चल रहा है? सार्वजनिक रूप से सामने आए पोस्टरों और शिकायतों का हवाला दें तो, यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि जबलपुर की एक फर्म 'वर्चुअल क्रिस्टल मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड' को कथित तौर पर विशेष तवज्जो दी जाती है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ऐसा बताया जाता है कि जहां-जहां अधिकारी की पदस्थापना होती है, यह फर्म कथित रूप से वहां पहले ही पहुंचकर अपना काम शुरू कर देती है। निकाय की अहम फाइलों के गायब होने और ठेकेदार के इस कथित नेक्सस की शिकायतों ने पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या इन आरोपों के बीच जनता को यूं ही हलाकान होने के लिए छोड़ दिया जाएगा?

**क्या सिवनी और करेली का दागदार इतिहास ही कथित कार्यशैली का हिस्सा है?**

क्या यह सच है कि विवादों से इनका पुराना नाता रहा है? प्राप्त दस्तावेजों और उच्च स्तरीय जांच प्रतिवेदनों का हवाला दें तो, सिवनी और करेली नगर पालिका में पदस्थापना के दौरान कथित तौर पर कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। दस्तावेजों में दर्ज शिकायतों के अनुसार, जेम पोर्टल के नियमों को कथित रूप से दरकिनार कर बाजार दर से अधिक कीमत पर खरीदी करने और चहेती संस्थाओं को ठेका देने के आरोप जांच में सही पाए जाने का दावा किया गया है। इन कथित मामलों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), ईओडब्ल्यू (EOW) और लोकायुक्त में भी विस्तृत शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ऐसे में जनमानस में यह सवाल उठ रहा है कि क्या धनपुरी में भी करेली और सिवनी जैसी कथित अनियमितताओं को दोहराने की जमीन तैयार की जा रही थी?

**क्या भ्रष्ट तंत्र को बचाने के लिए नियमों की कथित अनदेखी हो रही है?**

क्या हमारे सिस्टम में जांच के घेरे में आए अधिकारियों को संरक्षण देना आम बात हो गई है? दस्तावेजों में दर्ज शिकायतों के हवाले से यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि जबलपुर संभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी कथित तौर पर उन्हें बचाने में लगे हुए हैं। शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेजों में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए यह प्रश्न उठाया है कि जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप जांच में सिद्ध पाए गए हों, उन्हें फील्ड पोस्टिंग क्यों दी जा रही है? क्या ऐसे दागदार इतिहास वाले अधिकारी को महत्वपूर्ण पदों पर बिठाना उन ईमानदार अधिकारियों के मनोबल को तोड़ना नहीं है? अब देखना यह है कि इन गंभीर आरोपों और शिकायतों के आधार पर वरिष्ठ अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं, या फिर धनपुरी की जनता यूं ही कथित मनमानी का शिकार होती रहेगी।


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