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केजीएफ चैप्टर 1: केजीएफ की तर्ज पर पाताल चीर रहा कोल माफिया, बुढ़ार से केशवाही तक बिछी खूनी सुरंगें




 नवागत कलेक्टर और नवागत पुलिस कप्तान क्या उठाएंगे ठोस कदम बंद होगा अवैध कोल खनन




शहडोल: जिले की छाती को छलनी कर केजीएफ फिल्म की तर्ज पर काले सोने की समानांतर सरकार बेखौफ चलाई जा रही है। बुढ़ार क्षेत्र में खुलेआम चार नई अवैध कोयला खदानों का संचालन शुरू कर माफिया ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को खुली चुनौती दे दी है। बकहो, बकही और आसपास के तमाम इलाकों से लेकर केसवाही के मरखी माई तक, भारी मशीनरी, लाखों की लागत वाले हाई-पावर पंप और अत्याधुनिक ड्रिलिंग मशीनें उतारकर धरती का सीना बेदर्दी से चीरा जा रहा है। पाताल तक खोदी गई अवैध खदानों में खुलेआम ब्लास्टिंग कर प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कोयला निकाला जा रहा है, और यह सब भोपाल के कथित सिंडिकेट के दंभ पर हो रहा है।




खादी की चमक और धमकी का काला गठजोड़


इस पूरे काले साम्राज्य की आड़ में कई मौकापरस्त नेताओं की खादी का रंग भी खूब चमक रहा है। सिर्फ चमकी और धमकी के दम पर अपना खौफ जमाने वाले ये सफेदपोश नेता अब सीधे तौर पर आम जनता के निशाने पर आ चुके हैं। क्षेत्र की अवाम अब मुखर होकर यह सवाल पूछ रही है कि क्या इन नेताओं की ये काली करतूतें और उनके सिंडिकेट का काला सच उनके आलाकमान तक पहुंचेगा? जो खादी जनसेवा के नाम पर पहनी गई थी, वह आज कोयले के काले तस्करों की सबसे मजबूत ढाल बनकर खड़ी है।


दिखावे का अल्पविराम और नए माफियाओं का उदय


जिले में अधिकारियों के बदलने के बाद जो कथित अल्पविराम लगा है, वह सिर्फ एक दिखावा और छलावा मात्र है। इसी दिखावे की आड़ में देर रात तक कोयला चोरी और अवैध उत्खनन का काला खेल बदस्तूर जारी है। इस पूरे नेक्सस में माफिया पुत्रों को जमकर बढ़ावा मिल रहा है और इसी संरक्षण के चलते गुल्ली और संजय जैसे बड़े माफियाओं का जन्म हुआ है। अवैध उत्खनन के इस बेखौफ नेटवर्क में इकरा और लालपुर महाराज जैसे शातिर माफिया पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं, जो रातों-रात इस काले कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।


क्या होगा ठोस एक्शन या जारी रहेगा काला खेल?


अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन नवोदित माफियाओं और उनके आकाओं की कोई निष्पक्ष जांच होगी? क्या यह दिखावे का अल्पविराम कभी स्थायी पूर्णविराम में तब्दील हो पाएगा, या फिर बाजार की चर्चाओं के अनुसार, कोयले की बढ़ती कीमतों के साथ यह खूनी खेल एक बार फिर नए रेट कार्ड के साथ बदस्तूर जारी रहेगा? नवागत कलेक्टर पार्थ जायसवाल और नवागत पुलिस अधीक्षक संजय अग्रवाल की कार्यप्रणाली पर अब सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या वे इन खतरनाक सुरंगों को ब्लास्टिंग के जरिए हमेशा के लिए जमींदोज कर सिंडिकेट की कमर तोड़ेंगे, या यह पूरी कवायद सिर्फ कागजी नोटिसों और रस्म अदायगी तक ही सीमित रह जाएगी।

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