एक तरफ बाघ गलियारे के बखान, दूसरी तरफ 15 खदानों से तबाही का खौफनाक चक्रव्यूह: प्रशासन की दोहरी नीति का हुआ पर्दाफाश
तीन खदानों को हरी झंडी, चार की सिफारिश: लाखों एकड़ जंगल उजाड़ने की तैयारी के बीच जारी की गई भ्रामक खबर!
शहडोल। जनसंपर्क विभाग द्वारा हाल ही में शहडोल जिले को बाघों और हाथियों का "प्राकृतिक गलियारा" बताते हुए जो खबरें जारी की गई हैं, वे पूरी तरह से भ्रामक और जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। 'घुनघुटी बचाओ अभियान' ने इन खोखले दावों का कड़ा खंडन किया है। यह खबर महज एक डैमेज कंट्रोल है, जिसे मुख्यमंत्री के 25 अक्टूबर को होने वाले शहडोल दौरे से ठीक पहले इसलिए प्लांट किया गया है ताकि प्रशासन को बाघों और जंगलों के प्रति संवेदनशील दिखाया जा सके। लेकिन सच्चाई यह है कि जिस गलियारे (टाइगर कॉरिडोर) के संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें इस खबर में की जा रही हैं, उसी गलियारे को हमेशा के लिए नष्ट करने का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है।
हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और:
जनसंपर्क विभाग की खबर में कहा गया है कि शहडोल के जंगल बाघ, हाथी, तेंदुए और भालू के स्वतंत्र विचरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इसी इलाके (घुनघुटी, मारवाटोला, मालाचुआ आदि) में लगभग 15 नई कोयला खदानों का जाल बिछाया जा रहा है। इनमें से 3 खदानों को तो हरी झंडी मिल चुकी है, 4 को अनुमति की सिफारिश कर दी गई है और शेष कतार में हैं। इन खदानों से 15,000 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि तबाह हो जाएगी और लाखों पेड़ कटेंगे। जब जंगल ही नहीं बचेंगे, तो वन्यजीव कहां से गुजरेंगे? यह साफ तौर पर प्रशासन की दोहरी नीति को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री को भ्रमित करने की साजिश:
मुख्यमंत्री का शहडोल दौरा तय है और उससे ठीक पहले ऐसी खबरें जारी करना सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को भ्रमित करने का प्रयास है। प्रशासन यह जताना चाहता है कि वह वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि पर्दे के पीछे खदान माफियाओं को इसी वन क्षेत्र को उजाड़ने की अनुमति दी जा रही है। यह महज एक पीआर स्टंट है ताकि जनता और मुख्यमंत्री का ध्यान 15 खदानों की उस महाविनाशकारी योजना से हटाया जा सके, जिसके खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक में याचिका स्वीकार हो चुकी है।
बयान का कड़ा विरोध:
'घुनघुटी बचाओ अभियान' के तहत इस भ्रामक खबर का कड़ा विरोध किया जा रहा है। यदि प्रशासन सचमुच वन्यजीव गलियारों और हाथियों की आवाजाही को लेकर इतना ही फिक्रमंद है, तो वह सबसे पहले उन 15 खदानों के प्रस्तावों को निरस्त करे, जो बाघ कॉरिडोर से महज 50 से 100 मीटर की दूरी पर खोदी जाने वाली हैं। केवल कागजों पर प्राकृतिक संपदा का गुणगान करने और धरातल पर जंगलों को खदान माफियाओं को सौंपने का यह खेल अब जनता के सामने उजागर हो चुका है।


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