विस्थापितों के हक पर डाका: स्थानीय सलाहकार समिति के वादों को रद्दी मानकर नई भर्ती का आत्मघाती रास्ता!
बड़ा खुलासा: बांधवगढ़ में नियम ताक पर, फर्जी 'पात्रता' और कागजी खानापूर्ति का नया खेल!
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की जिस तरह से व्याख्या की जा रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि 197 गाइड्स के हितों की अनदेखी कर अपनों को उपकृत करने का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है। स्थानीय सलाहकार समिति की बैठक में स्वयं प्रबंधन द्वारा गाइड्स की पर्याप्त संख्या स्वीकार किए जाने के बावजूद, कोर्ट द्वारा दिए गए 'विवेकपूर्ण निर्णय' के अधिकार को कथित तौर पर मनमानी का जरिया बनाने के संकेत मिल रहे हैं। विस्थापितों की प्राथमिकता को दरकिनार कर बाहरी संपन्न लोगों को सूची में शामिल करना, प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
संवाददाता गजेंद्र सिंह परिहार की विशेष रिपोर्ट
शहडोल / उमरिया : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का प्रबंधन इन दिनों माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश की जिस तरह से व्याख्या कर रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि नई भर्तियों के लिए एक कृत्रिम आधार तैयार किया जा रहा है। रिट याचिका क्रमांक डब्लू.पी.-38539/2025 में दिनांक 06.10.2025 को पारित आदेश का हवाला देकर इसे एक 'मजबूरी' के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। जबकि उक्त आदेश के पेज नंबर 2 की कंडिका 3 में माननीय न्यायालय ने स्पष्ट रूप से अंकित किया है कि— "न्यायालय ने मामले के मेरिट्स पर कोई राय व्यक्त नहीं की है" और प्रतिवादी क्रमांक 3 (क्षेत्र संचालक) अपने "स्वयं के विवेक" (इन हिज ओन विजडम) से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। साफ़ है कि कोर्ट ने प्रबंधन को नियमों की बलि देने का आदेश नहीं दिया, बल्कि विवेकपूर्ण और नियम सम्मत फैसला लेने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
क्षेत्र संचालक की चेतावनी और 197 गाइड्स का संकट
प्रबंधन की कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल खुद विभाग की स्थानीय सलाहकार समिति की रिपोर्ट से खड़ा होता है। दिनांक 02.09.2025 को आयोजित समिति की बैठक के कार्यवाही विवरण के पेज नंबर 6, बिंदु क्रमांक 7 में क्षेत्र संचालक ने स्वयं लिखित तौर पर यह दर्ज कराया था कि— "वर्तमान में पार्क में 197 गाइड कार्यरत हैं, जिनका रोटेशन में नंबर आने में ही 2 से 3 दिन का समय लग जाता है।" इसी रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर यह आशंका जताई गई थी कि यदि नए गाइडों का पंजीयन किया गया, तो वर्तमान में कार्यरत इन 197 गाइड्स के नियोजित रहने के अवसरों और उनकी मासिक आय में भारी गिरावट आएगी। इसके बावजूद सहायक संचालक ताला द्वारा दिनांक 20.12.2025 को पत्र क्रमांक 1133 जारी करना, समिति के ही तर्कों के विपरीत प्रतीत होता है।
विस्थापितों से वादाखिलाफी और नियमों का उल्लंघन
स्थानीय सलाहकार समिति की बैठक के दस्तावेज़ के पेज नंबर 5 पर दर्ज बिंदु क्रमांक 3 में यह महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया गया था कि— "नवीन पंजीयन के समय विस्थापित ग्राम वासियों को सर्वप्रथम प्राथमिकता प्रदान की जायेगी।" लेकिन वर्तमान में जारी 23 आवेदकों की सूची को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि इस प्राथमिकता वाले नियम को पूरी तरह से विस्मृत कर दिया गया है। विभाग की यह कार्रवाई न केवल पुराने गाइड्स के आर्थिक हितों पर प्रहार करती नजर आ रही है, बल्कि उन विस्थापितों के साथ भी न्याय होता नहीं दिख रहा जिन्होंने पार्क के संरक्षण के लिए अपनी पुश्तैनी संपत्तियां त्याग दी थीं।
साक्षात्कार का दिखावा और भविष्य की अराजकता
दिनांक 27.12.2025 को ईको सेन्टर ताला में आयोजित होने वाला साक्षात्कार महज एक औपचारिक कागजी खानापूर्ति और दिखावा प्रतीत होता है। जब फील्ड ऑफिसर स्वयं समिति की रिपोर्ट (पेज 6) पर यह चेतावनी दे चुके हैं कि पार्क में अतिरिक्त गाइड्स की कोई आवश्यकता नहीं है, तो फिर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना किसी बाहरी दबाव या विशेष मंशा की ओर इशारा करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग का 'विवेक' केवल कुछ खास चेहरों को भर्ती करने के लिए सक्रिय हुआ है। यदि यह प्रक्रिया संपन्न होती है, तो बांधवगढ़ की पर्यटन व्यवस्था में अराजकता फैलना तय माना जा रहा है।
विवादों का केंद्र बना बांधवगढ़ प्रबंधन
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन बीते कुछ समय से अपनी विवादित कार्यप्रणाली को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है। चाहे वह नन्हे हाथियों की संदिग्ध मौत का मामला हो, पर्यटकों की जिप्सी में धक्का लगवाने की घटना हो, या फिर बाघों की लगातार हो रही मौतें—इन तमाम घटनाओं ने प्रबंधन की प्रशासनिक पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चर्चा है कि डिप्टी डायरेक्टर पी.के. वर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर भी कुछ उच्च स्तरीय शिकायतें शासन तक पहुँचने की खबरें मिल रही हैं। पार्क के भीतर बढ़ती अराजकता और प्रशासनिक लापरवाही के बीच अब गाइड भर्ती का यह नया विवाद प्रबंधन की साख को और अधिक धूमिल करता नजर आ रहा है।
छोटे साहब' की मेहरबानी और वसूली की चर्चाएं
पार्क के गलियारों में ऐसी चर्चाएं आम हैं कि 'बहुचर्चित छोटे साहब' कोर्ट के आदेश को ढाल बनाकर कथित तौर पर रसूखदारों को उपकृत करने के प्रयास में जुटे हैं। जनचर्चाओं की मानें तो, किसी बाहरी व्यक्ति के माध्यम से इस भर्ती प्रक्रिया में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी की कानाफूसी भी हो रही है। सूची में रिसॉर्ट मैनेजर, जिप्सी मालिक और संपन्न परिवारों के लोगों के नाम शामिल होने से यह अंदेशा और गहरा जाता है कि क्या वास्तविक जरूरतमंदों और स्थानीय बेरोजगारों को दरकिनार किया जा रहा है? ऐसा प्रतीत होता है कि योग्य और विस्थापितों का हक छीनकर केवल 'विशेष संबंधों' और अन्य कारणों के आधार पर यह नियुक्तियां की जा रही हैं।
इनका कहना है
जानकारी आपके माध्यम से संज्ञान में आई है मैं दिखवाता हूं।
पीके वर्मा
उपसंचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व,उमरिया
आपके द्वारा बताए गए बिंदुओं ने गाइड भर्ती पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, पहले हम अपने स्तर पर विवेचना कर लें फिर बताते हैं क्या माजरा है।
डॉ अनुपम सहाय
क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया








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