भाजपा में जिंदा कार्यकर्ता की वैल्यू सिर्फ दरी बिछाने तक, मरने के बाद उसे न्याय दिलाने कोई बड़ा नेता नहीं आता आगे!
ग्रामीन लगा रहे न्याय की गुहार, इधर चुप्पी साधे बैठे भाजपा के मठाधीश मना रहे 'त्यौहार'
मंडल अध्यक्ष की संदिग्ध मौत पर जिला अध्यक्ष अमिता चपरा मना रहीं 'बर्थडे', शर्मसार हुआ जिले का भाजपा संगठन
शहडोल में भारतीय जनता पार्टी संगठन अपने सब से बुरे दौर से गुजर रहा अभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने धन, गाड़ी पैसा वालों को प्राथमिकता मिलने का मामला अभी शांत ही नहीं हुआ था की भारतीय जनता पार्टी में अब कार्यकर्ताओं की हैसियत सिर्फ दरी बिछाने और रैलियों में भीड़ जुटाने तक ही सीमित रह गई है। अगर किसी निष्ठावान कार्यकर्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली जाए, तो उसे न्याय दिलाने के लिए पार्टी का कोई भी रसूखदार नेता खड़ा नहीं होता है। शहडोल में युवा मोर्चा के करकी मंडल अध्यक्ष राहुल द्विवेदी और अतुल तिवारी की संदिग्ध मौत के बाद यही खौफनाक और कड़वा सच सामने आया है। जहां एक ओर शहर के मुखर पत्रकार और ग्रामीण पीड़ित परिवार के साथ मिलकर न्याय की आवाज पूरी ताकत से बुलंद कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पूरी भाजपा और उसकी जिला अध्यक्ष अमिता चपरा को जैसे सांप सूंघ गया है और वे जन्मदिन की पार्टी में केक काटने में मस्त हैं। यह बेशर्मी साफ दिखाती है कि सत्ता के अहंकार में भाजपा ने अपने ही कार्यकर्ताओं की लाशों पर निष्ठुर और घिनौनी राजनीति करना शुरू कर दिया है।
गजेंद्र सिंह परिहार की रिपोर्ट...
शहडोल। शहडोल जिले में भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा पूरी तरह से बेनकाब होकर आम जनता के सामने आ चुका है। जहां एक तरफ करकी मंडल अध्यक्ष राहुल द्विवेदी और उनके साथी की रक्तरंजित लाशें न्याय की गुहार लगा रही हैं, वहीं जिला संगठन पूरी तरह से मौन साधे बैठा है। शहर के जाने-माने पत्रकार राहुल मिश्रा लगातार सोशल मीडिया और अपने समाचारों के माध्यम से ग्रामीणों के साथ इस कथित हत्या के खिलाफ प्रखर आवाज उठा रहे हैं। पत्रकारों और ग्रामीणों के भारी दबाव के बावजूद जिले के सत्ताधारी भाजपाई मठाधीशों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है और वे त्यौहार मनाने में व्यस्त हैं। हद तो तब हो गई जब कार्यकर्ता की चिता की आग शांत भी नहीं हुई थी और जिला अध्यक्ष अमिता चपरा अनमोल सोनी को केक खिलाकर जश्न मना रही थीं। सत्ता और संगठन की इस घोर संवेदनहीनता ने साबित कर दिया है कि भाजपा में अब मरे हुए कार्यकर्ता की कोई कीमत नहीं बची है।
जिंदा कार्यकर्ता दरी बिछाए, मरने पर कोई साथ न आए
भाजपा हमेशा से खुद को कार्यकर्ताओं की इकलौती हितैषी पार्टी बताती रही है, लेकिन शहडोल की इस घटना ने इस खोखले नारे की धज्जियां उड़ा दी हैं। जमीनी हकीकत यह है कि जब तक कार्यकर्ता जिंदा है, उससे सिर्फ दरी बिछाने और रैलियों में झंडे ढोने का मजदूरी वाला काम लिया जाता है। लेकिन जैसे ही राहुल द्विवेदी जैसे युवा नेता की संदिग्ध मौत होती है, पूरी पार्टी बड़ी ही बेशर्मी से अपना मुंह फेर कर किनारा कर लेती है। पीड़ित परिवार और ग्रामीण हत्या का आरोप लगाकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय दिलाने के लिए कोई भी बड़ा नेता आगे नहीं आया है। यह पार्टी का सबसे घिनौना रूप है जहां एक समर्पित कार्यकर्ता की जान की कीमत सत्ता के गलियारों में पूरी तरह से शून्य हो चुकी है। यह शर्मनाक दोहरा मापदंड आम कार्यकर्ताओं के मनोबल को बुरी तरह से कुचल कर रख रहा है और पार्टी के अंतर्विरोध को उजागर कर रहा है।
पत्रकार और ग्रामीण मांग रहे न्याय, भाजपा मना रही त्यौहार
इस पूरे मामले में जहां राजनीतिक दल के नेताओं को आगे आना चाहिए था, वहां शहर के सजग पत्रकार और ग्रामीण अपना सच्चा धर्म निभा रहे हैं। चिर-परिचित पत्रकार राहुल मिश्रा ने फेसबुक और अपने समाचारों के जरिए ग्रामीणों के साथ मिलकर न्याय की प्रखर और जन-समर्थित मुहिम छेड़ दी है। राहुल मिश्रा के साथ शहर के अन्य पत्रकार भी कंधे से कंधा मिलाकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और हत्या का मामला दर्ज करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि जिस पार्टी का मंडल अध्यक्ष मारा गया, उस भाजपा के मठाधीशों ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है और वे त्यौहार मना रहे हैं। किसी भी बड़े नेता ने राहुल मिश्रा या ग्रामीणों की इस न्याय यात्रा में शामिल होने या उनका साथ देने की थोड़ी सी भी जहमत नहीं उठाई है। यह रहस्यमयी खामोशी चीख-चीख कर बता रही है कि भाजपा को अब अपने कार्यकर्ताओं के न्याय से ज्यादा अपनी कुर्सी और सत्ता प्यारी हो गई है।
खून से सनी सड़क और जिला अध्यक्ष का केक
शहडोल भाजपा के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या हो सकता है कि उनकी जिला अध्यक्ष अमिता चपरा मानवीय संवेदनाएं पूरी तरह से खो चुकी हैं। जब राहुल द्विवेदी के परिजन आईजी और एसपी कार्यालय के बाहर न्याय के लिए बिलख रहे थे, तब अध्यक्ष महोदया बर्थडे पार्टी मनाने में पूरी तरह मशगूल थीं। नगर मंडल महामंत्री अनमोल सोनी को अपने हाथों से केक खिलाती उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं जो जले पर नमक छिड़क रही हैं। यह तस्वीरें उन तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं के गाल पर एक जोरदार तमाचा हैं जो रात-दिन पार्टी के लिए अपना खून-पसीना एक करते रहते हैं। एक तरफ पार्टी के निष्ठावान सिपाही की चिता जल रही है और दूसरी तरफ बेशर्मी के साथ क्रीम और केक का मीठा स्वाद लिया जा रहा है। यह निष्ठुरता इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जिला संगठन को कार्यकर्ताओं के असहनीय दर्द और न्याय से अब कोई सरोकार नहीं रह गया है।
प्रशासन की लीपापोती और न्याय का बढ़ता इंतजार
इस संदिग्ध मौत को साधारण सड़क दुर्घटना बताकर रफा-दफा करने की पुलिस प्रशासन की जल्दबाजी भी कई गंभीर और अनसुलझे सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीण और पत्रकार लगातार इसे एक सोची-समझी हत्या बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन पुलिस सिर्फ अपनी कागजी खानापूर्ति कर रही है। अगर भाजपा का जिला संगठन वास्तव में चाहता तो प्रशासन पर दबाव बनाकर इस मामले का दूध का दूध और पानी का पानी कर सकता था। लेकिन सत्ताधारी दल की इस रहस्यमयी और कायरतापूर्ण चुप्पी ने प्रशासन को और भी ज्यादा मनमानी करने की खुली और अघोषित छूट दे दी है।
इनका कहना है...
"मुझे यह पता नहीं था कि कोई ज्ञापन देने जा रहा है, मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। मैं कल शहर से बाहर थी और शाम 6 बजे ही लौटी हूँ। हालांकि, मैंने पूरा विषय संज्ञान में लिया है और टीआई व एसपी से बातचीत कर इस मामले की गंभीर जांच की मांग की है। मैं लगातार एसपी साहब के संपर्क में हूँ, यह घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।"
*श्रीमती अमिता चपरा, भाजपा जिला अध्यक्ष, शहडोल*




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