वायरल वीडियो ने खोली पोलः नन्हे शावक को खिलौना समझकर दौड़ा रहीं जिप्सियां, सो रहा महकमा
बीटीआर बना रसूखदारों की अय्याशी का अड्डाः बेबस हुआ बाघ और बेपरवाह अधिकारी
घट रही बाघों की साइटिंग और प्रबंधन का मनमानी रवैयाः अब सिर्फ ‘जुगाड़’ से ही होता है बाघ का दीदार
बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व, जो कभी बाघों के कुनबे के लिए दुनिया भर में गौरव का प्रतीक था, आज पार्क प्रबंधन की निकम्मेपन और रसूखदारों की गुलामी के चलते अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। यहाँ के जंगलों में अब बाघों की दहाड़ से ज्यादा उन सफारी वाहनों का शोर गूँजता है, जिन्हें कायदे-कानूनों को कुचलने की खुली छूट मिली हुई है। विडंबना देखिए कि जिस रफ़्तार और रौब से बाघ जंगल का राजा कहलाता था, आज वही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) क्षेत्र संचालक और डिप्टी डायरेक्टर की नाक के नीचे रसूखदार पर्यटकों की सनक के आगे बेबस नजर आ रहा है। संरक्षण के नाम पर करोड़ों डकारने वाला यह महकमा अब महज रसूखदारों का श्गुलामश् बनकर रह गया है, जहाँ बाघों की सुरक्षा से ज्यादा विशिष्ट प्रभाव रखने वाले पर्यटकों की अय्याशी को प्राथमिकता दी जा रही है। मगधी जोन का वायरल वीडियो इस बात का प्रमाण है कि फील्ड डायरेक्टर से लेकर डिप्टी डायरेक्टर तक, सभी अपनी जिम्मेदारियों से आँखें मूँदकर गहरी नींद में सो रहे हैं।
(विशेष संवाददाता गजेंद्र सिंह परिहार की रिपोर्ट)
शहडोल/उमरिया। विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में इन दिनों संरक्षण की आड़ में भ्रष्टाचार और मनमानी का गंदा खेल चल रहा है। सर्वाेच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों को रद्दी का टुकड़ा समझकर कचरे के डिब्बे में फेंक दिया गया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने बाघों की सुरक्षा के लिए जो दिशा-निर्देश दिए थे, उन्हें पार्क प्रबंधन के आला अधिकारियों ने रसूखदारों के तलवे चाटने के चक्कर में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। जीपीएस ट्रैकिंग जैसे सुरक्षा उपकरणों को महज दिखावा बना दिया गया है, ताकि जंगल के भीतर रसूखदारों को ‘नियमों को कुचलने’ की आजादी रहे।
वायरल वीडियो और मौत को दावत
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो बांधवगढ़ प्रबंधन के मुंह पर एक करारा तमाचा है, जिसमें रसूखदार पर्यटकों की जिप्सियां एक नन्हें शावक को शिकार की तरह बेतहाशा दौड़ाती नजर आ रही हैं। यह न केवल वन्यजीव नियमों का उल्लंघन है, बल्कि एक खौफनाक हादसे को दावत देने जैसा है। यदि उस वक्त शावक की मां वहां मौजूद होती, तो वह अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए जिप्सियों पर आत्मघाती हमला कर सकती थी, जिससे पर्यटकों की जान जाना तय था। इंसानी दखल और शोर-शराबे का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि यह नन्हा शावक या तो इंसानों के प्रति हिंसक हो जाएगा या डर के मारे अपनी टेरिटरी छोड़कर पलायन कर जाएगा। प्रबंधन की इस लापरवाही ने बेजुबान शावक के भविष्य और पर्यटकों की सुरक्षा, दोनों को दांव पर लगा दिया है।
जिम्मेदारों की शह पर बर्बरता
संरक्षण व्यवस्था की पोल खोलता एक और शर्मनाक मामला सामने आया है, जहाँ मात्र दो वर्ष के मासूम बाघ शावक को पर्यटकों और गाइडों द्वारा किसी खिलौने की तरह बेतहाशा दौड़ाया गया। फोटोग्राफी के गंदे जुनून में वन्यजीवों की मर्यादा को तार-तार कर दिया गया है। एनटीसीए की गाइडलाइंस को ताक पर रखकर किए गए इस कृत्य ने यह साबित कर दिया है कि बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर के लिए बाघ अब सुरक्षित वन्यजीव नहीं, बल्कि रसूखदारों के मनोरंजन का सामान मात्र रह गए हैं। अधिकारियों की यह चुप्पी किसी बड़ी मिलीभगत की ओर इशारा करती है। इस बीच, डिप्टी डायरेक्टर के कामकाज और उनकी कार्यशैली को लेकर मिल रही शिकायतों ने भी अब तूल पकड़ना शुरू कर दिया है, जिनकी गंभीर चर्चा हम अपने अगले अंक में विस्तार से करेंगे।
अंधा प्रबंधन और रफ़्तार का तांडव
जंगल के शांत माहौल को चीरते सफारी वाहनों की बेतहाशा रफ़्तार पर किसी का नियंत्रण नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पार्क के भीतर वाहन 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की जानलेवा रफ्तार से दौड़ रहे हैं, लेकिन एसी कमरों में बैठे साहबों को यह नजर नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की ऐसी धज्जियां उड़ते देख हर कोई हैरान है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही की शिकायतें क्षेत्र संचालक कार्यालय की चौखट तक पहुँचने के बाद भी साहबों की श्कुंभकर्णी नींदश् नहीं टूट रही है। क्या प्रबंधन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
बाघों की मौत का नंगा नाच
बांधवगढ़ का सबसे कड़वा और खौफनाक सच यह है कि यहाँ बाघों की साइटिंग अब इतिहास बनती जा रही है। वे नामचीन बाघ, जो कभी बांधवगढ़ की पहचान थे, प्रबंधन की लापरवाही और कथित मिलीभगत के चलते एक-एक कर मौत की नींद सुला दिए गए। पार्क में टाइगर की कम होती सक्रियता और लगातार होती संदिग्ध मौतें सीधे तौर पर फील्ड डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि टूरिज्म के नाम पर बांधवगढ़ प्रबंधन यहाँ ‘बाघों की मौत का नंगा नाच’ करवा रहा है।
एनटीसीए का गला घोंटते रसूखदार
बांधवगढ़ में नियमों की बलि चढ़ाने का खेल अब जगजाहिर हो चुका है। केंद्र सरकार के राजपत्र में प्रकाशित एनटीसीए की गाइडलाइंस (बिंदु 2.2.15) को प्रबंधन ने खुद ही दफन कर दिया है। मगधी जोन के वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि नियमों को ठेंगा दिखाते हुए वाहनों ने नन्हें शावक को घेरकर उसे डराया और दौड़ाया। यह न केवल वन्यजीव अपराध है, बल्कि उन अधिकारियों की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है जिन्हें इन बेजुबानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। क्या एनटीसीए इन ‘कुर्सी पर जमे’ जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कठोर कार्रवाई करेगा?
इनका कहना है
यह पूरा मामला अभी आपके माध्यम से ही मेरे संज्ञान में आया है और संबंधित वीडियो भी सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है। जिस दिन की यह घटना बताई जा रही है, उस दिन मैं व्यक्तिगत अवकाश पर था, फिर भी इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जाएगी।
डॉ. अनुपम सहाय
क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व

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