नन्हे शावक को दौड़ाने और पर्यटकों से धक्का लगवाने वाली जिप्सियों पर गिरी गाज
प्रशासन ने जारी किए आदेशः 3 जिप्सियां, 3 चालक और 2 गाइड 7-7 दिन के लिए प्रतिबंधित
बाँधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा से जुड़े जिन गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था, उस पर आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। इस धारदार खबर का संज्ञान लेते हुए पार्क प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई की है। शावकों को जिप्सी से खदेड़ने और खराब वाहन के कारण पर्यटकों से धक्का लगवाने के मामले में दोषी पाए गए वाहन चालकों, गाइडों और उन जिप्सियों को एक सप्ताह के लिए पार्क प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
शहडोल/उमरिया। मग्धी जोन में बाघ के नन्हे शावकों का पीछा करने और उन्हें जिप्सियों से डराने का मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। कार्यालय पर्यटन अधिकारी द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, वाहन क्रमांक एमपी 54 टी 1245 और एमपी 54 टी 0887 को नियम विरुद्ध गतिविधि में शामिल होने के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस प्रकरण में दोषी चालक कमलेश सिंह, अभिषेक पाण्डेय और गाइड राजेश साहू व मनजीत सिंह पर 7 दिनों का कड़ा प्रतिबंध लगाया गया है।
खटारा वाहन और चालक बाहर
जोहिला जोन में असुरक्षित वाहन ले जाकर पर्यटकों की सुरक्षा को जोखिम में डालने की घटना पर भी प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाया है। कोबरा न्यूज़ के खुलासे के बाद कि कैसे खराब वाहन के कारण पर्यटकों को बीच जंगल में गाड़ी को धक्का लगाना पड़ा, प्रशासन ने कार्रवाई की है। वाहन क्रमांक एमपी 54 टी 1006 के चालक रामबहोरी यादव को नोटिस थमाते हुए वाहन और चालक दोनों को 30 दिसंबर तक के लिए तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल
भले ही प्रशासन ने अब कार्रवाई की है, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर ऐसी घटनाएं घटित ही क्यों होने दी जाती हैं? जांचकर्ता अधिकारियों की सतर्कता उस समय कहाँ होती है जब नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही होती हैं? क्या जिप्सियों की फिटनेस और गाइडों की कार्यप्रणाली की निगरानी केवल कागजों तक सीमित है? प्रबंधन की यह कार्रवाई साबित करती है कि व्यवस्थाओं में जमीनी सुधार की अब भी भारी जरूरत है।
फिटनेस खेल की जवाबदेही
प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए यह पूछना लाज़मी है कि जिन जिप्सियों में धक्का लगाने की नौबत आ रही है, उन्हें ‘फिट’ बताकर जंगल के भीतर प्रवेश देने वाले जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्या कर रहे हैं? क्या इन खटारा गाड़ियों के संचालन के पीछे किसी प्रकार की मिलीभगत है? जिस तरह से अब नोटिस जारी किए गए हैं, उससे स्पष्ट है कि अगर मीडिया सजग न हो, तो शायद ये गंभीर लापरवाही कभी प्रकाश में ही न आए।
गाइड भर्ती में नियमों की बलि
जिप्सियों पर कार्रवाई तो हो गई, लेकिन पार्क में 27 गाइडों की भर्ती का मामला अब भी सुलग रहा है, जिस पर कार्रवाई होना शेष है। कोर्ट के आदेश के बहाने जिस तरह से इन 27 गाइडों की भर्ती को अपनी मनमानी के तर्ज पर करके खेल खेला जा रहा है, वह बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। इस पूरी प्रक्रिया में जो ‘वसूली’ की चर्चाएं आम हो रही हैं, क्या प्रबंधन उन पर लगाम लगाएगा? क्या विस्थापित ग्राम वासियों के साथ हो रहे इस अन्याय का प्रतिकार फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय लेंगे या फिर सब कुछ ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया जाएगा?


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