जयसिंहनगर थाना या 'रेत कंपनी'? वर्दी की आड़ में चल रहा संगठित सिंडिकेट, रक्षक ही कर रहे खनिज संपदा का सौदा
शासन की आँखों में धूल और माफियाओं को 'फूल': जयसिंहनगर में 'सिस्टम' हुआ हाईजैक, नदियों को खोखला कर भरी जा रही निजी तिजोरियाँ
मीडिया हब शहडोल
शहडोल। जिले का जयसिंहनगर थाना अब कानून के राज के बजाय अवैध रेत खनन के ‘सिंडिकेट मुख्यालय’ में तब्दील हो चुका है। थाना प्रभारी और स्थानीय पुलिस की भूमिका अब संदेह के घेरे में नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष तौर पर माफियाओं के संरक्षक जैसी नजर आ रही है। सूत्रों की पुख्ता मानें तो थाने में बैठे एक कथित ‘प्राइवेट मैनेजर’ के जरिए क्षेत्र में दौड़ रहे 50 से अधिक अवैध रेत वाहनों से हर महीने करीब 30 लाख रुपये का ‘मासिक नजराना’ वसूला जा रहा है। पिछले 4 महीनों में इस सिंडिकेट ने करोड़ों के राजस्व का चूना सरकार को लगाया है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी रात के अंधेरे में ‘जाम से जाम’ टकराने और माफियाओं की गाड़ियों को सुरक्षित पास कराने में व्यस्त हैं।
थाने का ‘सुपर बॉस’ बना बहरूपिया मैनेजर
पूरे जयसिंहनगर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर थाने की कमान किसके हाथ में है? थाने के अंदर एक ऐसा शख्स बैठा है जो इस पूरे रेत सिंडिकेट का संचालन कर रहा है। यह व्यक्ति एक ‘बहरूपिया’ की तरह काम करता है कभी खुद को साहब का ‘ड्राइवर’ बताता है, कभी साहब का सबसे ‘खास आदमी’ बताता है, तो कभी स्थानीय ‘नेता’ का चोला ओढ़ लेता है। हकीकत यह है कि यही वह शख्स है जो सिंडिकेट का ‘सीईओ’ बना बैठा है। थाने के सारे गुप्त समझौते, रेट लिस्ट और एंट्री पास इसी के इशारे पर जारी होते हैं और यही तय करता है कि किस माफिया की गाड़ी सड़क पर दौड़ेगी और किसकी थाने में खड़ी होगी।
50 गाड़ियां और 30 लाख की अवैध वसूली का गणित
इस काले कारोबार की ‘लाल डायरी’ के पन्ने पलटे जाएं तो भ्रष्टाचार का आंकड़ा होश उड़ाने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, जयसिंहनगर क्षेत्र में 50 से अधिक ट्रैक्टर अवैध रेत परिवहन में दिन-रात लिप्त हैं। उस ‘बहरूपिया मैनेजर’ द्वारा तय किए गए रेट के अनुसार, प्रति ट्रैक्टर हर हफ्ते 10,000 से 15,000 रुपये की ‘फिक्स’ रकम वसूली जाती है। अगर इसका गणित जोड़ा जाए तो 50 गाड़ियां और 15,000 रुपये हफ्ते के हिसाब से यह रकम 7.5 लाख रुपये साप्ताहिक होती है। यानी महीने की सीधी ‘काली कमाई’ 30 लाख रुपये है। यह वह रकम है जो बिना किसी रिकॉर्ड के सीधे जेबों में जा रही है।
सरकारी गाड़ी का दिखावा और साहब की प्राइवेट गश्त
इस खेल का सबसे शर्मनाक पहलू रात को देखने मिलता है। पुलिस गश्त के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। एक तरफ सरकारी पीसीआर (100 डायल) सायरन बजाते हुए सिर्फ दिखावे के लिए मुख्य मार्गों पर घूमती है ताकि जनता को लगे कि पुलिस जाग रही है। वहीं दूसरी तरफ, असली खेल ‘साहब की प्राइवेट गाड़ी’ से होता है। यह प्राइवेट लग्जरी गाड़ी यह सुनिश्चित करने के लिए निकलती है कि माफियाओं के साथ ‘‘कुछ गलत न हो’’। साहब और उनका मैनेजर इसी गाड़ी में बैठकर जंगलों और घाटों का मुआयना करते हैं, जहाँ अंदर ही ‘जाम से जाम’ टकराते हैं और माफियाओं को ‘वीआईपी सुरक्षा’ दी जाती है।
सीडीआर और टॉवर लोकेशन से खुलेगी पोल
अगर पुलिस के आला अधिकारी या जिले के पुलिस कप्तान इस मामले की निष्पक्ष जांच करना चाहें, तो दूध का दूध और पानी का पानी एक मिनट में हो सकता है। चुनौती है कि थाने के जिम्मेदार अधिकारियों, उस कथित ‘मैनेजर’ और क्षेत्र के रेत माफियाओं की मोबाइल कॉल डिटेल्स (सीडीआर) और टॉवर लोकेशन का मिलान कराया जाए। इतना ही नहीं, आजकल सुरक्षित बात करने के लिए इस्तेमाल हो रही व्हाट्सएप कॉल हिस्ट्री भी खंगाली जाए। हमारे पास कुछ ऐसे ‘वीडियो साक्ष्य’ भी संग्रहित हैं जो इस नापाक गठबंधन की गवाही दे रहे हैं। रात 10 बजे के बाद इनकी लोकेशन थाने में नहीं, बल्कि उन सुनसान रास्तों और घाटों पर मिलेगी।
हलफल से भटीगवां तक नदियों का सीना छलनी
जयसिंहनगर क्षेत्र की जीवनदायिनी नदियां रेत माफियाओं के लिए एटीएम मशीन बन गई हैं। हलफल नदी, कौआसरई, गधिया, चुदी नदी और भटीगवां घाट से दिन-रात (24 घंटे) रेत का अवैध उत्खनन जारी है। कभी मैन्युअल तो कभी जेसीबी मशीनों से नदियों का सीना चीरा जा रहा है और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचाई जा रही है। पिछले चार महीनों में जिस रफ्तार से रेत निकाली गई है, उससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया है क्योंकि उनकी ‘किश्त’ समय पर पहुंच रही है।
इनका कहना है
इस संबंध में जानकारी के लिए थानाप्रभारी जयसिंहनगर से दूरभाष में संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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