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बांधवगढ़ का 8 माह का शावक एंक्लोजर फांदकर लापता, प्रबंधन की सुरक्षा के दावों की निकली हवा!


लापता शावक पर मंडराता मौत का साया: 'सोन कुत्तों' और 'वयस्क बाघों' से है जान का खतरा!

बाघ सुरक्षा की खुली पोल: बाड़े से नन्हा बाघ गायब, इधर 8 दिन पहले बफर जोन में एक बाघ पर बरसे थे पत्थर और डंडे!

 अभी लगभग 8 दिन पूर्व पनपथा बफर के छोटी बेल्दी गांव में वन कर्मियों की मौजूदगी में एक बाघ पर लाठी-डंडे और पत्थर बरसाने का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब 8 माह के एक नन्हे शावक के 'लापता' होने ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की पोल खोल दी है। यह वही शावक है जिसे कुछ समय पूर्व सलखनिया बीट में एक गिरे हुए पेड़ की खोह (हॉलो) से बेहद सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया था। लेकिन विडंबना देखिए, जिस शावक को जंगल में मौत के मुंह से निकालकर प्रबंधन अपनी पीठ थपथपा रहा था, उसे बठान के सुरक्षित बाड़े (एंक्लोजर) में भी नहीं बचा सका। अब हालत यह है कि ताला रेंज ऑफिसर राहुल किरार कह रहे हैं कि शावक 5 मीटर की फेंसिंग पर चढ़कर और उसे कूदकर भाग गया, जबकि दूसरी ओर डिप्टी डायरेक्टर पी.के. वर्मा दावा कर रहे हैं कि वह शिफ्टिंग के लिए लगाए गए 'केज' पर चढ़कर बाहर कूद गया।

पेड़ की खोह में सहमा था अनाथ बाघ शावक,रेस्क्यू के दौरान की फोटो



गजेन्द्र सिंह परिहार की विशेष रिपोर्ट

शहडोल/उमरिया: आखिर हमारे विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को किसकी नजर लग गई है? कभी बाघों के कुनबे के लिए पहचाना जाने वाला यह जंगल अब केवल कुप्रबंधन और लापरवाहियों का अड्डा बन चुका है। ताजा मामला बठान में एंक्लोजर से 8 माह के शावक के लापता होने का है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था के परखच्चे उड़ा दिए हैं। अभी मात्र 8 दिन पहले ही बफर जोन के बेल्डी गांव में एक बाघ पर पत्थर और डंडे बरसाए जाने का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि इस नई घटना ने प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विडंबना देखिए कि पूर्व में नन्हे शावकों को जिप्सी से दौड़ाने का मामला भी प्रकाश में आया था। इसके साथ ही गाइड भर्ती के नाम पर विस्थापितों का हक मारकर रसूखदारों को उपकृत करना और जंगल के अंदर पर्यटकों से जिप्सी में धक्का लगवाना जैसी शर्मनाक तस्वीरें भी सामने आईं। इन तमाम घटनाओं की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि एक नन्हे शावक की जान को जोखिम में डालकर प्रबंधन ने मध्य प्रदेश के इस गौरव पर फिर कालिख पोत ली है।





मंडराता मौत का साया: सोन कुत्तों और शिकारियों का डर

बाड़े से बाहर निकलते ही इस नन्हे शावक पर मौत के हजार खतरे मंडराने लगे हैं। सबसे डरावनी बात यह है कि अभी मात्र दो दिन पहले ही ताला क्षेत्र के इसी बठान इलाके के आसपास सोन कुत्तों (वाइल्ड डॉग्स) का एक आक्रामक झुंड देखा गया था। ये जंगली कुत्ते झुंड में हमला करने के लिए कुख्यात हैं और एक अकेले 8 माह के शावक के लिए ये साक्षात काल हैं। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के अंदर मौजूद वयस्क नर बाघ (टेरिटोरियल मेल्स) भी इसे अपना प्रतिद्वंद्वी मानकर मार सकते हैं। भूख से तड़पना और शिकार न कर पाना इसकी जान का सबसे बड़ा दुश्मन है।

सुरक्षा का 'घेरा' या मासूम के लिए 'कफन'?

जिस एंक्लोजर को इस अनाथ शावक की जान बचाने के लिए 'सुरक्षा कवच' होना था, वह प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण उसके लिए 'कफन' साबित होता नजर आ रहा है। यह शावक अपनी माँ को पहले ही खो चुका है और अभी खुद शिकार करने में पूरी तरह अक्षम है। ऐसे में उसे खुले जंगल में असुरक्षित छोड़ देना उसे सीधे मौत के मुंह में धकेलने जैसा है। बाड़े की सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध लगना यह बताता है कि प्रबंधन के लिए वन्यजीवों की जान की कोई कीमत नहीं है।

अधिकारियों के बयानों पर उठे गंभीर सवाल

अधिकारियों के विरोधाभासी बयान साफ कर रहे हैं कि बांधवगढ़ में मॉनिटरिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही थी। सवाल यह है कि जब नन्हा शावक एंक्लोजर में था, तो प्रबंधन क्या सो रहा था? जिस फेंसिंग को मासूम की ढाल बनना था, उसे अधिकारियों की अनदेखी ने आज उसके लिए 'कफन' बना दिया है। रेंजर खुद मान रहे हैं कि फेंसिंग मात्र 5 मीटर की थी और केज को उसके पास छोड़कर शावक को खुद भागने का रास्ता दिया गया। पास ही सोन कुत्तों और वयस्क बाघों का साया मंडरा रहा है, लेकिन अधिकारी इसे 'सामान्य' बता रहे हैं। क्या प्रबंधन को उस अनाथ शावक की मौत का इंतजार है?

इनका कहना है:

"शावक की शिफ्टिंग एक सामान्य प्रक्रिया थी जिसके लिए बाड़े के पास केज (पिंजरा) रखा गया था। बाड़े की फेंसिंग तो 10 से 12 फीट ऊंची है, लेकिन शावक उसी केज पर चढ़कर बाहर कूद गया। हमारी टीमें उसे ढूंढने में लगी हुई हैं और जल्द ही शावक को सुरक्षित वापस ले आया जाएगा।"

डॉ. अनुपम सहाय

फील्ड डायरेक्टर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया


"शावक के लापता होने का मामला प्रकाश में आया है। शावक के पग-मार्क मिले हैं, जिसके आधार पर टीम लगाकर लगातार तलाश की जा रही है। तीन हाथियों की टीम और मैदानी अमले को शावक की खोज में लगा दिया गया है। इलाके की सघन सर्चिंग की जा रही है और हम जल्द ही शावक को लोकेट कर लेंगे। वह केज पर चढ़कर कूदकर भाग गया है।"

पी.के. वर्मा

डिप्टी डायरेक्टर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया


"आमतौर पर जो एंक्लोजर होता है उसकी फेंसिंग 5 मीटर की होती है और 8 माह का शावक उसी 5 मीटर की फेंसिंग पर चढ़कर वहां से कूदकर भाग गया जिसे कर्मचारियों ने देखा है। इसके बाद से हम लगातार टीम के साथ सर्चिंग कर रहे हैं। दिन भर पूरी टीम लगी हुई थी, जिनकी भोजन आदि की व्यवस्था भी जंगल के अंदर ही की गई थी। हाथियों का दल और हमारी टीम लगातार पग-मार्क्स के आधार पर तलाश कर रही है। जल्द ही उसे ढूंढ लिया जाएगा।"

राहुल किरार

रेंज ऑफिसर, ताला, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व

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