बाघों का 'बूचड़खाना' बना विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: प्रबंधन के पाप की बलि चढ़ा अनाथ मासूम!
बठान के एंक्लोजर में रखे शावक की मौत से पूरे प्रदेश में मचा हड़कंप: वन विभाग की कार्यशैली पर खड़े हुए गंभीर सवालिया निशान!
पाप की बलि चढ़ा अनाथ शावक: एंक्लोजर में सुरक्षा नहीं, साजिश की मौत सोया मासूम!
सोन कुत्तों के झुंड और वयस्क बाघ से शावक के जान के खतरे की हमने जताई थी आशंका ..
16 फीट का झूठ और अफसरों का वीआईपी तमाशा: एंक्लोजर से लापता होने के ड्रामे ने खड़े किए थे कई सवाल, अंत में उजागर हुई प्रबंधन की खूनी कारगुजारी!
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कल जिसे 'लापता' बताया जा रहा था, आज उसकी लाश ने प्रबंधन के मुंह पर कालिख पोत दी है। 16 फीट (5 मीटर) ऊंची फेंसिंग लांघने की 'सुपरमैन थ्योरी' सुनाकर अफसरों ने जनता को बेवकूफ बनाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन मासूम शावक के शव ने इस पूरी कहानी का पर्दाफाश कर दिया। यह महज एक बाघ की मौत नहीं है, बल्कि यह अनाथ शावक के साथ किया गया वह 'सरकारी कत्ल' है, जिसकी स्क्रिप्ट प्रबंधन की लापरवाही और सफेद झूठ ने मिलकर लिखी थी।
गजेंद्र सिंह परिहार की विशेष रिपोर्ट
शहडोल/उमरिया: विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अब वन्यजीवों की सुरक्षित शरणस्थली नहीं, बल्कि उनकी 'बलिगाहे' में तब्दील हो चुका है। बठान के एंक्लोजर में हुई शावक की मौत ने यह साफ कर दिया है कि यहाँ का प्रबंधन संवेदनहीनता और अकर्मण्यता की पराकाष्ठा पार कर चुका है। जिस गौरवशाली जंगल को दुनिया बाघों के कुनबे के लिए पूजती थी, आज उसी की माटी को लापरवाह अफसरों ने बाघों के खून से लाल कर दिया है। कभी शावकों को जिप्सियों से कुचलने का प्रयास, कभी रसूखदारों की चाकरी में विस्थापितों के हक पर डाका, और कभी पर्यटकों से जिप्सी में धक्का लगवाने वाली शर्मनाक करतूतें—ये महज घटनाएं नहीं, बल्कि उस सड़े हुए सिस्टम की बानगी हैं जहाँ वन्यजीवों की जान की कीमत अफसरों के अहंकार और ऐशो-आराम से कम आंकी जाती है।
जानें क्या है यह पूरा मामला?
कल अचानक खबर आई कि बठान के 'सुरक्षित' एंक्लोजर से 8 माह का शावक लापता हो गया है। हमारी टीम द्वारा पूछताछ करने पर रेंजर राहुल किरार, डिप्टी डायरेक्टर पी.के. वर्मा और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने बयान जारी कर दावा किया कि शावक 16 फीट (5 मीटर) की फेंसिंग और केज के ऊपर से कूदकर भाग गया है। इसके बाद तीन हाथियों की फौज और मैदानी अमले को जंगल में उतारकर सर्चिंग का भारी-भरकम ढोंग रचा गया। दिन भर पग-मार्क खोजने की कहानी सुनाई जाती रही, लेकिन आज उसी शावक का शव बरामद होने से सारा ड्रामा फेल हो गया। हालांकि दबी जुबान में यह बात भी निकल कर सामने आ रही की यह शावक लापता शावक नहीं है लेकिन यह भी सिर्फ बहाने बाजी प्रतीत हो रही है यह साफ प्रतीत हो रहा कि प्रबंधन जिस शावक को सुरक्षित ढूंढने का दावा कर रहा था, वह उनकी लापरवाही के चलते पहले ही दम तोड़ चुका था।
साजिश की बू: मौत एंक्लोजर में, लाश जंगल में?
यह पूरा घटनाक्रम अब एक "रिटर्न स्क्रिप्ट" साबित होता दिख रहा है। क्षेत्र में यह जन चर्चा जोरों पर है कि मासूम शावक की मौत दरअसल एंक्लोजर के अंदर ही हो चुकी थी, लेकिन अपनी लापरवाही और कारगुजारी छिपाने के लिए प्रबंधन ने शावक के शव को जंगल में फिंकवा दिया। अब इसे किसी अन्य नर बाघ द्वारा मारा गया बताकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। अगर शावक सच में एंक्लोजर के अंदर था, तो वह 16 फीट की दीवार फांदकर बाहर कैसे पहुँचा? यह सवाल आज भी प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
वीआईपी कल्चर और खूनी लापरवाही
इस पूरे मामले में बांधवगढ़ प्रबंधन पर आरोपों की झड़ी लग गई है। सूत्रों का कहना है कि बठान एंक्लोजर के अंदर शावक की मौत किसी हादसे में नहीं, बल्कि प्रबंधन की उस 'खूनी लापरवाही' से हुई है जिसे वीआईपी कल्चर ने पाला है। आरोप है कि रसूखदारों और उनके मेहमानों को 'प्राइवेट सफारी' का आनंद देने के लिए शावक को लगातार मानवीय दखल से परेशान किया गया। हकीकत यह है कि मासूम शावक की जान प्रबंधन की 'पिकनिक' और लापरवाही ने ली है।
टाइगर स्टेट या 'बाघों का कब्रिस्तान'?
मध्य प्रदेश को मिला 'टाइगर स्टेट' का तमगा अब बांधवगढ़ के कुप्रबंधन के कारण 'कब्रिस्तान स्टेट' में बदलता दिख रहा है। बांधवगढ़ अब बाघों का गढ़ नहीं, बल्कि उनकी मौत का 'बूचड़खाना' बन चुका है। कभी जहर दिया जाता है, कभी करंट से शिकार होता है, और जब कुछ नहीं मिलता तो 'रेस्क्यू' के नाम पर शावकों को एंक्लोजर में कैद कर उन्हें तिल-तिल कर मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।
दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग
बांधवगढ़ में जारी मनमानी और मौतों के सिलसिले पर वरिष्ठ अधिकारी तत्काल संज्ञान लें। लापरवाह अफसरों पर निलंबन की ठोस कार्यवाही की जाए और जो बड़े अधिकारी जिम्मेदारी निभाने में अक्षम सिद्ध हुए हैं, उन्हें तत्काल पदमुक्त कर उच्च स्तरीय जांच बिठाई जाए।
इनका कहना है
प्रथम दृष्टया यह प्रतीत हो रहा है कि नर बाघ के हमले से शावक की मौत हुई है। मामले की गहन जांच जारी है, तथ्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।"
पी.के. वर्मा, डिप्टी डायरेक्टर
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया

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