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राजेंद्रग्राम में मास्टरमाइंड अतुल, रामजी और आदेश का 'अघोषित कसीनो': अमलाई-चचाई के जुआरी भी सिंडिकेट में शामिल, प्रतिदिन लाखों की नाल वसूली से मचा हड़कंप

 



राजेंद्रग्राम के जंगलों में 15 जिलों के जुआरियों का जमावड़ा: लखौरा और बेनीबारी रोड पर आखिर किसकी शह पर सज रही जुए की अंतरराष्ट्रीय बिसात?


अनूपपुर जिले में अंतरराज्यीय जुआरियों का डेरा: किसने दी संगठित अपराध की अनुमति, किसके संरक्षण में फल-फूल रहा यह 'अघोषित कसीनो'?


शहडोल/अनूपपुर। अनूपपुर जिले का राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र इन दिनों एक ऐसे संगठित अपराध का केंद्र बन चुका है, जिसने न केवल कानून की मर्यादा को तार-तार किया है, बल्कि सैकड़ों परिवारों की खुशियों को खाक करने की तैयारी कर ली है। लखौरा, नांदपुर और बेनीबारी रोड के जंगलों में संचालित इस जुआ फड़ में उत्तर प्रदेश के आगरा से लेकर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़, सूरजपुर, अंबिकापुर, बैकुंठपुर, सरगुजा और कटनी तक के लगभग 15 जिलों के एक सैकड़ा जुआरी प्रतिदिन शिरकत कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि यह पूरा खेल थाने की नाक के नीचे महज 8 किलोमीटर के दायरे में खेला जा रहा है। यह फड़ महज़ एक खेल नहीं, बल्कि एक ऐसा दलदल है जिसमें फंसकर आम आदमी अपनी उम्र भर की कमाई, ज़मीन और औरतों के जेवर तक गिरवी रख रहा है। जुए की इस लत और खाकी की कथित ‘हफ्ता वसूली’ के बीच संगठित अपराधियों ने अपना जाल बिछा दिया है, जहां फड़ पर ही भारी ब्याज दर पर ‘कॉल रेट’ पर पैसा बांटकर लोगों को सुदखोरी के जाल में फंसाया जा रहा है।



शौक बना अवैध धंधाः सिंहपुर और चचाई-अमलाई के सिंडिकेट ने बनाया ‘अघोषित कसीनो’ 


कभी शौक के लिए खेला जाने वाला जुआ अब राजेंद्रग्राम में एक संगठित और खूंखार धंधे में तब्दील हो चुका है। सूत्रों की मानें तो कथित सिंहपुर और चचाई-अमलाई के शातिर खिलाड़ियों सहित कथित अतुल नामक जुआ फड़ संचालक ने इस शौक को विशुद्ध कमाई के जरिए में बदल दिया है। इन लोगों ने जंगलों के बीच बड़े पैमाने पर ‘अघोषित कसीनो’ संचालित कर शहडोल संभाग में अपराध की नई पौध रोप दी है। यहाँ न केवल दांव लगते हैं, बल्कि हारने वालों को तत्काल मोटी ब्याज दरों पर रकम उपलब्ध कराकर उनकी संपत्ति हड़पने का चक्रव्यूह भी रचा जाता है।


गुरुवार को पौने पांच लाख की नाल वसूली और कथित ‘यादव’ का सेतु 


राजेंद्रग्राम के बीहड़ जंगलों में पिछले 3-4 दिनों से शुरू हुए इस फड़ की धमक अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो चुकी है। यहाँ बिजुरी, कोतमा, अनूपपुर, मनेंद्रगढ़, सूरजपुर, अंबिकापुर, बैकुंठपुर, सरगुजा, नरोजाबाद, पाली, बुढार और धनपुरी क्षेत्र के नामी जुआरी अपनी किस्मत और पुलिस की सेटिंग पर दांव लगा रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अकेले गुरुवार के दिन ही इस फड़ से लगभग पौने पांच लाख रुपये की ‘नाल वसूली’ (कमीशन) की जा रही है। इस पूरे काले कारोबार में एक कथित ‘यादव’ की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो फड़ संचालकों और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के बीच ‘सेतु’ का कार्य करते हुए अवैध धन की उगाही सुनिश्चित कर रहा है।


थाने से महज 8 किमी दूर और सीमा विवाद का रणनीतिक फायदा 


जुआ माफिया रामजी, आदेश और अतुल जैसे शातिर मास्टरमाइंड इस पूरे संगठित अपराध को शहडोल संभाग में स्थापित कर रहे हैं। इन संचालकों ने भौगोलिक स्थिति का बड़ी चतुराई से इस्तेमाल किया है। थाने से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर नांदपुर, लखौरा और बेनीबारी रोड के आसपास फड़ सजाया जा रहा है। यह फड़ मुख्य रूप से बेनीबारी रोड और राजेंद्रग्राम के बीच की सीमा पर संचालित होता है ताकि सीमा विवाद और दुर्गम रास्तों का फायदा उठाकर पुलिसिया कार्यवाही से बचा जा सके। 15 जिलों से आने वाले इन रसूखदारों के लिए यह जंगल किसी अभेद्य किले से कम नहीं हैं, जहाँ प्रतिदिन होने वाली लाखों की नाल वसूली इस अवैध साम्राज्य की मजबूती को बयां करती है।


चचाई कनेक्शन और 2 लाख का हफ्ता की चर्चा आम 


क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि राजेंद्रग्राम पुलिस की इस मेहरबानी के पीछे चचाई का पुराना इतिहास और रसूखदारों के साथ मधुर संबंध छिपे हैं। थाना के वर्तमान जिम्मेदार अधिकारियों के चचाई कार्यकाल के दौरान जो साठगांठ हुई थी, उसी की मियाद पर आज पूरे राजेंद्रग्राम की कानून व्यवस्था को गिरवी रख दिया गया है। कथित ‘यादव’ के माध्यम से तय हुई 2 लाख रुपये प्रति हफ्ते की पुख्ता ‘सेटिंग’ ने पुलिस के इकबाल को खत्म कर दिया है। अपराधी बेखौफ हैं और रक्षक ही अब इस संगठित अपराध के सबसे बड़े संरक्षक बनकर उभरे हैं।


सूचना तंत्र की विफलताः क्या कप्तान तक नहीं पहुंच रही असल जानकारी? 


इतने बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट के बावजूद अनूपपुर पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। यह गंभीर जांच का विषय है कि क्या जिले का खुफिया विभाग इतना पंगु हो चुका है कि उसे आगरा और छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल समेत 15 जिलों के अपराधियों की आवाजाही की भनक तक नहीं? अक्सर ईमानदार और संवेदनशील माने जाने वाले कप्तान की छवि को देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या उनके मातहत उन तक सही सूचनाएं पहुंचने ही नहीं दे रहे हैं? यह अंदेशा गहरा रहा है कि कप्तान को अंधेरे में रखकर निचले स्तर पर भ्रष्टाचार का यह खेल खेला जा रहा है। क्या खाकी के भीतर बैठा कोई अपना ही तंत्र कप्तान की बेदाग कार्यशैली के बीच दीवार बनकर खड़ा है और इस अवैध साम्राज्य को फलने-फूलने की जमीन दे रहा है?

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