Ticker

6/recent/ticker-posts

'वसूली कांड' का पैसा डकारने के लिए 'डीडी' ने 'बड़े साहब' के खिलाफ छेड़ी 'पेपर बाजी' की जंग, मातहतों के कंधे पर रखकर दाग रहे हैं गोले!


दोनों फंसे हैं एक ही नाव में फिर भी खुद को बचाने 'डीडी' ने अपनों को ही मैदान में उतारा, भर्ती घोटाले की रकम हजम करने का नया पैंतरा


 गजेंद्र परिहार - व्यंग्यात्मक विशेष

शहडोल : कहते हैं 'बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया', और इस कहावत को  'डीडी' ने अक्षरशः चरितार्थ कर दिया है। अपने ही विभाग के 'बड़े साहब' की आबरू तार-तार करने के लिए 'डीडी' ने अपने सबसे खास 'गुर्गे' को सुपारी दे डाली है। आदेश साफ है—'बड़े साहब' पर इतने तीर बरसाओ कि वो छलनी हो जाएं। यह सारा प्रपंच इसलिए, ताकि जो वसूली करके प्रक्रिया अधूरी छोड़ी गई थी, उसे पूरा करवाया जा सके। योजना यह है कि दबाव इतना भयंकर बनाया जाए कि कथित 'पेपर बाज' गुर्गे को मैनेज करने के लिए 'बड़े साहब' को अंततः 'डीडी' के कदमों में गिरना पड़े और फिर से 'डीडी' का सिक्का और पैसे का खेल चल सके।

'जाम' और 'काम' की यारी भूल, 'डीडी' ने दिखाई नमकहरामी 

विभाग के गलियारों में यह चर्चा आम थी कि 'डीडी' और 'बड़े साहब' की जुगलबंदी 'जाम' से लेकर 'काम' तक साथ-साथ चलती थी। दोनों एक ही थाली के चट्टे-बट्टे थे, लेकिन पैसे की हवस ने अब रिश्तों और वफादारी की परिभाषा बदल दी है। भर्ती वसूली कांड में जब देनदारी का फंदा कसने लगा, तो 'डीडी' ने पुरानी यारी को खूंटी पर टांग दिया। अपना दामन बचाने के लिए 'डीडी' ने अब उसी 'बड़े साहब' को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिनके साथ कभी वो साये की तरह रहते थे। सिर्फ पैसा कमाने और अपनी जेबें गर्म रखने के एकमात्र उद्देश्य के चलते 'डीडी' ने यह दुस्साहस किया है कि अपने ही सीनियर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

 काली कमाई बचाने के लिए 'साहब' की ओर मोड़ा 'उड़ता तीर'

'डीडी' बेहद शातिराना अंदाज में 'बड़ा खेल' खेल रहे हैं। कथित भर्ती घोटाले में फंसी रकम को वापस न करना पड़े, इसके लिए उन्होंने एक नई बिसात बिछाई है। जो जांच और सवालों का 'उड़ता तीर' खुद 'डीडी' की तरफ आ रहा था, उसे उन्होंने बड़ी चालाकी से 'बड़े साहब' की तरफ मोड़ दिया है। अपने मातहतों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाई जा रही यह 'पेपर बाजी' उसी साजिश का हिस्सा है। मकसद साफ है—माहौल इतना खराब कर दो कि 'बड़े साहब' बचाव की मुद्रा में आ जाएं और 'डीडी' चुपचाप मलाई काटकर निकल जाएं।

 अब 'बड़े साहब' किस करवट बैठेंगे, इस पर टिकी सबकी निगाहें 

सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस पूरे खेल में 'डीडी' और 'बड़े साहब' दोनों ही एक साथ फंसे हुए नजर आते हैं, लेकिन 'डीडी' ने पहले वार कर दिया है। मातहतों को आगे कर जिस तरह से 'बड़े साहब' की घेराबंदी की जा रही है, वह विभाग में चर्चा का विषय है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि 'बड़े साहब' इस हमले का जवाब कैसे देते हैं? क्या वो दबाव में आकर घुटने टेक देंगे या फिर 'डीडी' की पुरानी फाइलों और कारनामों का कच्चा-चिट्ठा खोलकर पलटवार करेंगे? ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका इंतजार अब पूरे महकमे को है।

Post a Comment

0 Comments