Ticker

6/recent/ticker-posts

'फोटोजीवी' कांग्रेसियों का पाप: फोटो खिंचवाकर की 'खानापूर्ति', 12वीं के छात्र को सीएम के काफिले के सामने झोंककर भिजवाया जेल!

 



सियासी तस्करी: कार्यकर्ताओं के टोटे में जीतू-अजय ने नाबालिग को बनाया 'ढाल', जेजे एक्ट की धारा 75 और 83 के तहत लटकी एफआईआर की तलवार!


वर्दी वाला गुंडाराज: बुढ़ार पुलिस का 'तालिबानी' फरमान, बाल सुधार गृह के बजाय अपराधियों के बीच ठूंसा, मानवाधिकारों की उड़ाई धज्जियां!


शर्मनाक: पहले आग में झोंका, अब सहानुभूति का ढोंग; छात्र के भविष्य की 'राख' पर रोटियां सेक रही बेशर्म कांग्रेस!


(विशेष संवाददाता गजेंद्र सिंह परिहार की रिपोर्ट)


शहडोल/बुढ़ार। शहडोल जिले में कांग्रेस की गिरती साख, वैचारिक शून्यता और जमीनी कार्यकर्ताओं के अकाल ने एक होनहार छात्र का भविष्य अंधकार के गर्त में धकेल दिया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बड़बोलेपन और जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी की लचर और अवसरवादी कार्यप्रणाली का खामियाजा शहडोल के 12वीं कक्षा के मासूम छात्र सत्यम को भुगतना पड़ा। जिस वक्त सत्यम को घर पर बैठकर, दो दिन बाद होने वाले अपने अंग्रेजी के पेपर की तैयारी करनी थी, उस वक्त कांग्रेस के 'मठाधीश' उसे अपनी गाड़ियों में "भेड़-बकरियों" की तरह भरकर शहडोल से बुढ़ार ले गए। वहां उसे मुख्यमंत्री का काफिला रोकने के लिए हो रहे 'प्रोटेस्ट' (विरोध प्रदर्शन) की आग में झोंक दिया गया, जिसका नतीजा छात्र की गिरफ्तारी और महत्वपूर्ण बोर्ड परीक्षा छूटने के रूप में सामने आया है।

जन चर्चा: 'सेल्फी' लेकर किनारे हुए नेता, नाबालिग को झोंका जेल की आग में

शहडोल के चौक-चौराहों पर अब कांग्रेस की भारी किरकिरी हो रही है और जनता इन नेताओं पर 'थू-थू' कर रही है। जन चर्चा और सूत्रों की मानें तो जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी सहित अन्य पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर केवल फोटो खिंचवाई और गिरफ्तारी का नाटक कर अपनी 'कोरम पूर्ति' कर ली। खुद तो 'सेल्फी' लेकर सुरक्षित किनारे हो गए, लेकिन हवा है कि इन नेताओं ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत नाबालिग छात्र सत्यम को सीएम का काफिला रोकने की 'व्यवस्था' में लगा दिया। नेताओं ने अपनी चमचमाती गाड़ियों में बैठकर सुरक्षा पा ली, जबकि उस मासूम को पुलिस की लाठियां खाने और जेल जाने के लिए आग में झोंक दिया। जनता कह रही है कि जब नेतृत्व ही ऐसा 'दगाबाज' हो जो अपनी चमड़ी बचाने के लिए बच्चों की बलि दे दे, तो ऐसी पार्टी का भगवान ही मालिक है।

राजनीति के गंदे खेल में फंसा सत्यम

शहडोल कांग्रेस के पास अब प्रदर्शन के लिए झंडा उठाने वाले कार्यकर्ता तक नहीं बचे हैं। अपनी इसी फजीहत को छिपाने के लिए स्थानीय नेताओं ने कथित तौर पर शहडोल निवासी नाबालिग छात्र सत्यम को गुमराह किया। उसे 'प्रोटेस्ट' का मतलब समझाए बिना भीड़ का हिस्सा बना दिया गया। यह सीधे तौर पर जीतू पटवारी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की उस दिवालिया मानसिकता को दर्शाता है, जहाँ अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए बच्चों के करियर की आहुति देना भी उन्हें जायज लगता है। सत्यम को यह तक नहीं पता था कि काफिला रोकने पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है, बस उसे राजनीति की बिसात पर मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया।

कानून का हंटर: कांग्रेसियों पर इन धाराओं में कसता है शिकंजा

कानूनी जानकारों के अनुसार, कांग्रेस नेताओं का यह कृत्य केवल अनैतिक ही नहीं, बल्कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (JJ Act) के तहत गंभीर अपराध है:

 * धारा 83 (2): किसी भी वयस्क या राजनीतिक समूह द्वारा बच्चे का उपयोग अवैध गतिविधियों (जैसे उग्र प्रदर्शन, चक्काजाम) के लिए करना। इसमें 7 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

 * धारा 75: बच्चे के प्रति क्रूरता या उसे ऐसी स्थिति में डालना जिससे उसे मानसिक या शारीरिक कष्ट हो। सत्यम को परीक्षा के समय जेल भिजवाना इसी श्रेणी में आता है।

शहडोल से बुढ़ार तक नाबालिग को भरकर ले जाना 'सियासी तस्करी' जैसा है, जिस पर बाल आयोग सख्त कार्रवाई कर सकता है।

पुलिस की वर्दी वाली गुंडागर्दी और कानून की अज्ञानता

बुढ़ार पुलिस की कार्यप्रणाली भी इस पूरे मामले में उतनी ही संदिग्ध, क्रूर और गैर-कानूनी रही है। पुलिस ने जेजे एक्ट के स्पष्ट प्रावधानों का उल्लंघन किया है:

 * धारा 10 (परंतुक): किसी भी परिस्थिति में एक कथित विधि विवादित बालक (नाबालिग) को पुलिस हवालात या सामान्य जेल में नहीं रखा जा सकता। उसे तत्काल 'विशेष किशोर पुलिस इकाई' या बाल कल्याण अधिकारी के संरक्षण में देना होता है।

 * सत्यम को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजे बोर्ड) के समक्ष पेश करने या बाल सुधार गृह भेजने के बजाय, उसे सीधे बुढ़ार उप-जेल (वयस्क अपराधियों के साथ) भेज देना पुलिस की घोर अकर्मण्यता है। पुलिस की इस "वर्दी वाली गुंडागर्दी" ने प्रशासन की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

जन चर्चा: बाल आयोग ने लिया संज्ञान, अजय अवस्थी और जीतू पटवारी जवाब-तलब!

शहडोल से लेकर बुढ़ार तक के सियासी गलियारों में अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि राज्य बाल संरक्षण आयोग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। दबी जुबान में लोग कह रहे हैं कि आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय अवस्थी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से जवाब-तलब करने की तैयारी कर ली है। जन चर्चा यह भी है कि बुढ़ार पुलिस भी आयोग के रडार पर आ चुकी है और आयोग ने सख्त लहजे में पूछा है कि आखिर किस नियम के तहत एक नाबालिग का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया? चर्चाओं का बाजार गर्म है कि बहुत जल्द बुढ़ार पुलिस और दोषी कांग्रेसी नेताओं पर आयोग का हंटर चलने वाला है।

शर्मनाक: जिला कांग्रेस ने झाड़ा पल्ला, सोहागपुर और युवा कांग्रेस ने बचाई लाज

इस पूरे मामले में जिला कांग्रेस कमेटी का 'दोगला चरित्र' भी खुलकर सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब नाबालिग छात्र को जेल से छुड़वाने और जमानत कराने की बात आई, तो जिला कांग्रेस कमेटी के मठाधीशों ने इससे पल्ला झाड़ लिया और किनारा कर लिया। जिस छात्र को वे खुद भरकर ले गए थे, उसे मुसीबत में अकेला छोड़ दिया। ऐसे में छात्र की रिहाई के लिए युवा कांग्रेस और सोहागपुर के कांग्रेस नेताओं को आगे आना पड़ा। उन्होंने ही भागदौड़ कर नाबालिग को जेल से रिहा करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि जिला कार्यकारिणी केवल तमाशबीन बनी रही।

गलती मानने के बजाय अब भी सियासत

इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि कांग्रेस को अब भी अपनी गलती का अहसास नहीं है। जन चर्चा है कि पहले तो कांग्रेस ने एक नाबालिग को, जिसकी सिर पर परीक्षा थी, उसे अपनी राजनीति चमकाने के लिए विरोध प्रदर्शन की आग में झोंक दिया। अब जब छात्र का साल बर्बाद हो गया, तो सूत्रों का कहना है कि कांग्रेसी अपनी गलती मानने के बजाय प्रशासन पर निशाना साधकर उसी छात्र के नाम पर 'सहानुभूति की राजनीति' कर रहे हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि उसे 'प्रोटेक्ट' करने की नौबत ही क्यों आई? उसे वहां ले ही क्यों गए थे? सत्ता की भूख के आगे बेबस कांग्रेस को यह नहीं दिख रहा कि उन्होंने एक घर का चिराग बुझाने का काम किया है।

Post a Comment

0 Comments